कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)
Kabir Sagar (11 Parts Complete)
by कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास
Source: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)
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( ११ )
उसको उन्होंने आकर सीधा करके शेष पानी को गिरने से बचाया । किन्तु ऊपरोक्त सत्तर पदों जिनको मुहम्मद साहबने अकेलेही पार किया था उनमें से एक २ की दूरी इतनी थी कि, पाँचसौ वर्ष तक वेग पूर्वक चलने से पूरा होता था ऐसे सत्तर पदों को मुहम्मद साहब ने पार किया । और इधर लौट कर आने पर क्षण मात्रा से अधिक समय नहीं लगा । मुसलमानी धर्मते इसी वृत्तान्त को मुहम्मद साहबका मेआराज होना कहते हैं । इसी विषयमें मुसलमानी धर्मके बडे २ पण्डितोंमें बहुत मतभेद है । कोई तो कहता है कि, मुहम्मद साहबने स्वप्न देखा था, कोई कहता है केवल संकरूप से वहाँ पहुँचे थे, कोई कहता है केवल प्रथम भूमिका (बैतुलअकसा) तक गये थे, कोई कहता है कि, अन्तरहृष्टिसे मुहम्मदसाहेब वहाँ पहुँचे, कोई कहता है केवल जिबराईलको देखा खुदाको नहीं देखा, कोई कहता है पाँच-भौतिक शरीर सहितही मुहम्मद साहेब आसमानपर गये और इसी प्रत्यक्षकी हृष्टिसे खुदाको देखा । विस्तार भयसे अधिक मतभेदका लिखना छोड़कर यथार्थ आशयकी ओर झुकता हूँ ।
पैगम्बरी मिलनेके बारहवें वर्षके पश्चात् मुहम्मदसाहबको मेआराज हुआ था उसका आशय है कि, जब मुमुक्षु श्रवण मनन निदिध्यासन द्वारा बारह महावाक्यका विचार कर लेता है तब यह मोक्ष का अधिकारी होता है । और ५२ वर्षसे आशय है ५२ अक्षरसे सो जब यह ५२ अक्षर के वृत्त से बाहर होता है अर्थात् शब्द जालसे निकलता है तब इसको सच्चे सद्गुरु की शरणकी प्राप्ति होती है । जहाँ शुद्ध बुद्धि रूप जिबराईल जो शुद्ध सतोषुण से प्राप्त होती है और शुद्ध संतोष रूप में कार्दल जो रजोगुण की शुद्धता से मिलता है इसके साथ