भारतकोश
कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

Kamba Ramayana Hindi

महाकवि कम्बन द्वारा

स्रोत: Kamba Ramayana in Hindi Translation (Vol 1) (उद्गम)

DevanagariHindipublished549 पृष्ठ

पृष्ठ 11, कुल 549 में से

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वाक्य होते हैं। पूर्वकालिक कृदन्तो के सहारे लम्बे-से-लम्बे वाक्य लिखे जा सकते हैं। हिन्दी मे ऐसा संभव नही है। हिन्दी में कृदन्त-विशेषण के द्वारा भूत और भविष्य काल को स्पष्ट नही किया जा सकता। इस कारण कंबन के कुछ लम्बे वर्णनो का अनुवाद यथामूल प्रस्तुत करने मे बड़ी कठिनाई का अनुभव हुआ।

मूल में अनेक वृक्षो, लताओ, पशुओ, पक्षियो और विविध वस्तुओ का उल्लेख आया है। कही-कहीं मछलियो की अनेक जातियों और स्वभाव का वर्णन आया है। युद्ध-वर्णन मे अनेक प्रकार के शस्त्रास्त्रो तथा विविध व्यापारो का वर्णन हुआ है। इन सबका हिन्दी-अनुवाद यथामूल उपस्थित करने की भरपूर चेष्टा की गई है, फिर भी हिन्दी में उपयुक्त शब्दो के न मिलने के कारण कही कुछ नये शब्द गढ़ने पड़े हैं, कही तमिल का ही नाम देना पड़ा है।

यदि इस अनुवाद से मूल के सौंदर्य की थोड़ी-सी झलक भी पाठक पा सकेगे, तो यह लेखक अपने को कृतार्थ समझेगा।

इस अनुवाद-कार्य मे कई विद्वानो के परामर्श मुझे प्राप्त हुए हैं। पं० अवधनन्दन ने पूरी पांडुलिपि को देखकर उसका संपादन किया और कई सुझाव देने की कृपा की। वे० सु० गोपालकृष्णाचार्य की कंब रामायण-व्याख्या बहुत उपकारक रही। समय-समय पर अनेक तमिल तथा हिन्दी-विद्वानो ने मुझे इस कार्य में मार्गदर्शन प्रदान किया है। इन सबके प्रति मै हृदय से धन्यवाद समर्पित करता हूँ।

बिहार-राष्ट्रभाषा-परिषद् ने इस अनुवाद को प्रकाशित करने का भार अपने ऊपर लिया है। इससे न केवल राष्ट्रभाषा हिन्दी की, अपितु तमिल-भाषा की भी सेवा हो रही है। परिषद् को मेरे धन्यवाद हैं।

न० वी० राजगोपालन

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