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कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

Kamba Ramayana Hindi

महाकवि कम्बन द्वारा

स्रोत: Kamba Ramayana in Hindi Translation (Vol 1) (उद्गम)

DevanagariHindipublished549 पृष्ठ

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२ कंब रामायण

(मेरी इस मूर्खता पर) संसार मेरा उपहास करेगा और इससे मेरा अपयश होगा, फिर भी मैं रामचरित का गान करने लगा हूँ; इसका प्रयोजन यही है कि सत्यज्ञान तथा अलौकिक प्रतिभा से संपन्न (वाल्मीकि महर्षि) के दिव्य काव्य का महत्त्व और भी अधिक प्रकट हो।

जिन (सहृदय व्यक्तियों) के कान विविध प्रकार की रसमय कविता सुनने के आदी हो चुके हैं, उन्हें मेरी कविता उसी प्रकार (कर्कश) लगेगी, जिस प्रकार 'याल्'¹ (वीणा) के मधुर स्वर को सुनते हुए मुग्ध हो खड़े रहनेवाले अशुण² के कानों में 'पटह' (चमड़े के ढोल) की ध्वनि लगे।

(काव्य, नाटक और संगीत-रूपी) त्रिविध तमिल-वाङ्मय का जिन्होंने भली भाँति अध्ययन किया है, उन उत्तम विद्वानों और कवियों से मैं निवेदन करना चाहता हूँ—"क्या उन्मत्तों के वचन, मंद बुद्धिवालों के वचन तथा भक्तजनों के वचन, इनकी परीक्षा करना उचित हो सकता है?"

बालक (खेलते समय) धरती पर घरौंदे बनाते हैं, जिन में कोठरियाँ, आँगन, नृत्यशाला आदि स्थानों को कुछ टेढ़ी-मेढ़ी रेखाओं से दिखाने की चेष्टा करते हैं (उन्हें देखकर) क्या कुशल कारीगर (उन घरौंदों के शिल्प-शास्त्र के अनुकूल न होने से) क्षुब्ध होंगे? किंचित् भी काव्य-ज्ञान से रहित मैं, जो यह क्षुद्र काव्य रचने लगा हूँ, इस पर क्या मर्मज्ञ विद्वान् क्रुद्ध होंगे?

देववाणी (संस्कृत) में जिन तीन महापुरुषों³ ने रामायण की रचना की है, उनमें प्रथम कवि वाग्मी (वाल्मीकि) महर्षि की रचना के अनुसार ही मैंने तमिल-पद्यों में यह रामायण रची है।

धर्म-रक्षा के लिए, परम पुरुष ने जो अवतार लिये थे, उनमें से रामावतार का वर्णन करनेवाला यह प्रसिद्ध काव्य 'शडैयप्प वल्लल'⁴ के ग्राम 'तिरुवेण्णेय नल्लूर' में निर्मित हुआ। (१-११)


१ 'याल्' एक प्रकार की वीणा। प्राचीन तमिल-साहित्य में याल् का प्रायः उल्लेख हुआ है। यह माना जाता था कि याल् का स्वर सुनकर हिरन मन्त्रमुग्ध-सा हो जाता था और उसके बाद पटह की कर्कश ध्वनि का वह सहन नहीं कर सकता था और कभी-कभी वैसी ध्वनि सुनने पर अपने प्राण भी छोड़ देता था।
२ हिरन की एक जाति।
३ संस्कृत के तीन रामायणकर्त्ता हैं—वाल्मीकि, वसिष्ठ और बोधायन। कुछ विद्वान वसिष्ठ के स्थान पर व्यास का नाम लेते हैं, जिन्होंने 'अध्यात्मरामायण' की रचना की थी। कंब ने भी कई स्थानों में अध्यात्मरामायण का अनुसरण किया है।
४ शडैयप्प वल्लल एक धनी और उदार व्यक्ति थे। उन्होंने महाकवि कंबर को आश्रय दिया था। यद्यपि बाद को महाकवि कंबर चोलराजा के आश्रय में भी रहे थे, तथापि अपने प्रथम आश्रयदाता का हृदयंगम कृतज्ञता के साथ उन्होंने इस ग्रन्थ के आरंभ में कई स्थानों में किया है।