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कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

Kamba Ramayana Hindi

महाकवि कम्बन द्वारा

स्रोत: Kamba Ramayana in Hindi Translation (Vol 1) (उद्गम)

DevanagariHindipublished549 पृष्ठ

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तत्त्वदर्शी विद्वान् की आवश्यकता थी। किन्तु, इन सारे गुणों के रहते भी यदि वह व्यक्ति लेखन-कला में दक्ष न हुआ, तो भी समस्या उलझी ही रह जाने का भय था। किन्तु, ऐसे उपयुक्त अनुवादक को ढूँढ़ निकालने का सारा श्रेय श्रीअवधनन्दनजी को है। ये बिहार-प्रदेश के ही निवासी हैं, पर उस समय ये दक्षिण भारत हिन्दी-प्रचार-सभा (मद्रास) के माध्यम से तमिलभाषी क्षेत्र में हिन्दी-प्रचार का काम कर रहे थे। परिषद् के अनुरोध पर इन्होंने तेलुगु और तमिल—दोनो की रामायणों के अनुवाद करा देने का जिम्मा लिया और तदनुसार तमिल-रामायण के अनुवाद का काम श्री न० वी० राजगोपालन जैसे योग्य व्यक्ति को सौंपकर इसके सम्पादन का भार स्वयं सँभाला। श्रीअवधनन्दनजी के ऐसे सहयोग के लिए परिषद् सदा इनका आभारी है।

श्री न० वी० राजगोपालन तमिलनाड के तिरुचिरापल्ली जिले के निवासी हैं। आपने तिरुपति के श्रीवेङ्कटेश्वर प्राच्यकला-शाला-जैसी संस्था में संस्कृत-साहित्य के माध्यम से व्याकरण, न्याय और मीमांसा-शास्त्र का अध्ययन किया है। आपने कांचीपुरी में परमहंस-परिव्राजक श्रीरंग रामानुज महादेशिक और उ० वीर राघवाचार्य-सदृश महाविद्वानो से वेदान्त-दर्शन का भी अध्ययन किया। आपने फिर काशी-विश्वविद्यालय से हिन्दी में तथा मद्रास-विश्वविद्यालय से तमिल में एम० ए० की उच्च उपाधि प्राप्त की। आप तमिल, तेलुगु, सस्कृत, अँगरेजी, हिन्दी और खूबी यह कि उर्दू के भी सुलेखक हैं। आजकल आप केन्द्रीय हिन्दी शिक्षक-महाविद्यालय, आगरा में प्राध्यापक हैं। इसके पहले आप प्रेसीडेंसी कॉलेज (मद्रास) और दक्षिण भारत हिन्दी-प्रचार-सभा (मद्रास) में भी अध्यापन का कार्य कर चुके हैं।

कंब रामायण दस हजार श्लोकों का एक वृहत्काय महाकाव्य है, जो छह काण्डो मे विभक्त है। अतः, इसका प्रकाशन हम दो भागो में कर रहे हैं, जिससे ग्रन्थ का आकार-प्रकार सुहावना बना रहे। यह पहला भाग बालकांड से किष्किन्धाकांड तक है। दूसरे भाग मे केवल दो काण्ड होगे—सुन्दरकाण्ड और युद्धकाण्ड। किन्तु, दोनों भागो के आकार प्रायः समान होंगे, क्योकि केवल युद्धकाण्ड ही लगभग तीन काण्डों के बराबर है। आज हिन्दी-जगत् के समक्ष 'कंब रामायण' के इस पहले भाग को प्रस्तुत करते हुए हमें पूरा संतोष है और विश्वास है कि हिन्दी के प्रकाशनो में यह चार चाँद लगायेगा। आप इसमे महाकवि कम्बन की कवित्व-शक्ति की पराकाष्ठा का दर्शन कर अपने को निश्चय ही कृतार्थ मानेंगे, ऐसा मेरा विश्वास है। परिषद् का यह प्रकाशन उत्तर और दक्षिण में 'नये सेतु' का निर्माण करेगा और हमारे राष्ट्र की चिर एकात्मनिष्ठा को अधिकाधिक सुदृढ करेगा।

बिहार-राष्ट्रभाषा-परिषद्<br>पौष, कृष्णा एकादशी, २०१६ वि०भुवनेश्वरनाथ मिश्र 'माधव'<br>संचालक