कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)
Kamba Ramayana Hindi
महाकवि कम्बन द्वारा
स्रोत: Kamba Ramayana in Hindi Translation (Vol 1) (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंप्रस्तावना
बहुत दिनो से मेरे मन में यह अभिलाषा थी कि तमिल-साहित्य के कुछ प्राचीन ग्रन्थो का हिन्दी-अनुवाद प्रकाशित किया जाय, जिससे हिन्दीभाषा-भाषी जनता को तमिल-भाषा के प्राचीन साहित्य का रसास्वादन करने तथा वहाँ की समृद्ध संस्कृति एवं विचार-धारा को समझने का अवसर मिले। किन्तु, किसी योग्य प्रकाशक के अभाव में यह कार्य संभव नही था। सन् १६५५ ई० में मेरी भेट आदरणीय श्रीशिवपूजन सहायजी से हुई। उस समय वे बिहार-राष्ट्रभाषा-परिषद् के संचालक थे। जब मैने उनसे इस विषय की चर्चा की, तब वे बहुत प्रसन्न हुए और परिषद् की ओर से ऐसे ग्रन्थो को प्रकाशित करने का आश्वासन भी किया। उसी वर्ष २७ जुलाई को उनका एक पत्र मिला, जिसमें लिखा था कि राष्ट्रभाषा-परिषद् ने दक्षिण भारत की चारो भाषाओ में प्रचलित रामायणो का हिन्दी-अनुवाद प्रकाशित करने का निश्चय किया है। योग्य अनुवादक चुनने तथा अनुवाद के संशोधन आदि का भार उन्होंने मुझे सौंपा था। मै उस समय दक्षिण भारत हिन्दी-प्रचार-सभा की तमिलनाड-शाखा के मंत्री की हैसियत से कार्य कर रहा था और तिरुच्चिरापल्ली मे रहता था। सहायजी का पत्र पाकर मै उत्साह से भर गया और योग्य अनुवादको की तलाश करने लगा।
दक्षिण में चार प्रधान भाषाएँ बोली जाती हैं, जिनका अपना-अपना साहित्य है। वे हैं—तमिल, तेलुगु, कन्नड और मलयालम। तमिल मद्रास-राज्य में, मद्रास नगर तथा उसके दक्षिण में कन्याकुमारी तक बोली जाती है। तेलुगु आन्ध्रदेश की भाषा है और मद्रास के उत्तर मे विजगापट्टम् तक तथा हैदराबाद में बोली जाती है। कन्नड मैसूर-राज्य की भाषा है और मद्रास-राज्य के पश्चिम मे अरब समुद्र के तट तक बोली जाती है। मलयालम केरल-प्रान्त की भाषा है और दक्षिण मे तिरुवनन्तपुरम् (त्रिवेन्द्रम्) से अरब सागर के किनारे-किनारे कासरगोड तक बोली जाती है। ये चारो भाषाएँ द्रविड़-परिवार की हैं और आर्य-परिवार की भाषाओ से बहुत भिन्न हैं। तमिल को छोड़कर शेष तीन भाषाओ पर संस्कृत का बहुत प्रभाव पड़ा है और उन्होने संस्कृत से बहुत-से शब्द ग्रहण किये हैं। इन चारो भाषाओ में तमिल सबसे प्राचीन है और उसका प्राचीन साहित्य सबसे अधिक समृद्ध है।
उपर्युक्त चारो प्रान्तो मे रामकथा का प्रचार है और चारो भाषाओ मे रामायण की रचना हुई है। किन्तु, मलयालम रामायण एक आधुनिक रचना है और वाल्मीकि रामायण का छायानुवाद-मात्र है। मलयालम रामायण रामानुजन् एऴुत्तच्छन् नामक किसी कवि की रचना है, जो ईसवी-सन् १६वी और १७वी शती के मध्य वर्त्तमान थे। उन्होंने अपनी रामायण अध्यात्मरामायण के आधार पर लिखी है, जिसकी भाषा संस्कृत-गर्भित है। कन्नड की सबसे प्राचीन रामायण 'पप रामायण' के नाम से प्रसिद्ध है और 'पप' नामक एक जैनकवि की रचना है। पंप ने रामकथा मे बहुत हेर-फेर किया है और जैन दृष्टिकोण से