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कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

Kamba Ramayana Hindi

महाकवि कम्बन द्वारा

स्रोत: Kamba Ramayana in Hindi Translation (Vol 1) (उद्गम)

DevanagariHindipublished549 पृष्ठ

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परिचय नहीं दिया है, किन्तु उन्होंने अपनी रामायण मे तिरुवेण्णेयनल्लूर नामक ग्राम के 'शडयप्पवल्लजर' नामक एक दानी और यशस्वी व्यक्ति का उल्लेख कई स्थानो पर किया है। अनुमान किया जाता है कि इसी उदार व्यक्ति ने महाकवि कंबन को आश्रय दिया था, जिसकी कृतज्ञता मे महाकवि ने अपने काव्य में उस व्यक्ति का स्मरण किया है। यह ज्ञात होता है कि कंबन चोल और चेर राजाओ के दरबार मे गये थे, लेकिन अपनी महान् कृति को किसी राजा को अर्पित नहीं किया।

कंबन की रामायण तमिल-साहित्य की सर्वोत्कृष्ट कृति एव एक बृहद् ग्रन्थ है। १ तमिल, हिन्दी, अँगरेजी आदि के साहित्यो के बड़े विद्वान् श्री वी० वी० एस० अय्यर ने लिखा है कि 'यह (कब रामायण) विश्व-साहित्य में उत्तम कृति है, 'इलियड' और 'पैरेडाइस लास्ट' और महाभारत से ही नही, वरन् मूलकाव्य वाल्मीकि रामायण की तुलना मे भी यह अधिक सुन्दर है। यह केवल आदरातिरेक से कही हुई उक्ति नहीं है, वरन् अनेक वर्षों तक किये गये गहन अध्ययन से धीरे-धीरे पुष्ट हुआ विचार है।' २

कब रामायण वाल्मीकि रामायण का अनुवाद-मात्र नहीं है, उसका छायानुवाद कहना भी सगत नही है। कथानक-मात्र मूल से लिया गया है, लेकिन घटनाओं में सैकड़ों परिवर्त्तन किये गये हैं। प्रत्येक घटना के चित्रण में, परिस्थितियों को उपस्थित करने में, पात्रो के सम्भाषण में, प्राकृतिक दृश्यो के उपस्थापन में एवं पात्रो की मनोभावनाओं की अभिव्यक्ति मे कंबन ने पर्याप्त मौलिकता दिखलाई है। तमिल-भाषा की अभिव्यक्ति की दृष्टि से भी कंबन ने मौलिकता प्रदर्शित की है। छन्दोविधान में, अलकारों के प्रयोग में तथा शब्द-गुम्फन में अपूर्व सौन्दर्य प्रकट किया है। सीता-राम-विवाह, शूर्पणखा-प्रसंग, बालिवध, हनुमान् के द्वारा सीता-सदर्शन, इन्द्रजित् का वध, राम-रावण-युद्ध इत्यादि प्रसंगों में प्रत्येक अपनी विशिष्ट सुन्दरता के कारण अत्यन्त आकर्षक हुआ है। प्रत्येक प्रसंग अपने में सपूर्ण-सा लगता है, प्रत्येक मे काफी नाटकीयता है; प्रत्येक घटना का आरम्भ, विकास और परिसमाप्ति एक निश्चित क्रम से त्रिकसित होते हैं। यह शिल्प-विधान कंबन के काव्य की एक विशिष्टता है।

राम के चरित्र को कंबन ने जिस ढंग से चित्रित किया है, वह विशेष अध्ययन का विषय है। वाल्मीकि के सम्मुख यह प्रश्न था कि लोकोत्तर आदर्श पुरुष कौन हैं ? उन्हे 'पुरुषोत्तम' की खोज थी। नारद तथा ब्रह्मा से उन्हें ऐसे पुरुषोत्तम का परिचय प्राप्त हुआ। रामचरित का गान करके वाल्मीकि ने ससार के सम्मुख 'पुरुष पुरातन' की ही नही, अपितु एक 'महामानव' का चित्र उपस्थित किया था। कंबन के युग तक आते-आते वही आदर्श महामानव परमात्मा के अवतार के रूप मे प्रतिष्ठित हो चुका था। यह विश्वास दृढ हो गया था कि केवल राम-नाम का जप-मात्र अपवर्गप्रद हो सकता है। वैष्णव भक्ति का ज्यो-ज्यों प्रचार समाज में बढ़ा, त्यो-त्यो राम के प्रति आस्था अधिकाधिक बद्धमूल होती गई।


१. डॉ० आर० पी० सेतुपिल्लै, (तमिल-विभागाध्यक्ष, मद्रास-विश्वविद्यालय) का अँगरेजी लेख 'तमिल लिटरेचर'।
२. श्री वी० वी० एस० अय्यर : 'कव रामायणम्—ए स्टडी'।