भारतकोश
करूँ जगत से न्यार

करूँ जगत से न्यार

Karun Jagat Se Nyaar

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

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हैं, जिस रास्ते का हमें पता ही नहीं है, जो राह हमारी कल्पना से परे है, वहाँ हम गुरु के बिना कैसे चल सकेंगे ! गुरु के बिना हम भटक जायेंगे । ज़रूर भटक जायेंगे। इसलिए गुरु तो हमें करना ही पड़ेगा। गुरु के बिना तीर्थ, व्रत, जप, तप, दान आदि सब व्यर्थ हैं। गुरु के बिना ये किसी खाते में नहीं आने वाले । गुरु बिन माला फेरते, गुरु बिन देते दान |

गुरु बिन साहिब कह रहे हैं कि वेद-पुराणों से पूछ लेना, गुरु के बिना दिया दान हराम है, पूछो वेद पुरान।।

हुआ दान भी हराम है।

जो निगुरा सुमिरन करे, दिन में सौ सौ बार ।

नगर नायिका सत करै, जरै कौन की लार ।।

नगर नायिका कहते हैं - वेश्या को । अगर वेश्या सती होना चाहे तो किसके साथ जले ! ....... सारा शहर उसका पति है । साहिब कह रहे हैं कि निगुरे व्यक्ति का भजन करना भी ऐसा ही है। निगुरे का भजन करना या नहीं करना एक ही बात है। शुकदेव जैसा ज्ञानी मनुष्य, जो माता के पेट से ही ज्ञान लेकर आया था, जो बाहर ही नहीं आ रहा था, जब गुरु के बिना भक्ति कर रहा था तो नहीं पहुँच पाया था। गर्भ योगेश्वर गुरु बिना, लागा हरि की सेव ।

कहैं कबीर वैकुण्ठ से, फेर दिया शुकदेव ।।

गुरु के बिना इतने बड़े भक्त का क्या हाल हो गया ! विष्णु जी ने वापिस किया—जो तेरे लिए कोई जगह नहीं है; तूने गुरु नहीं किया है।

गुरु बिन हृदय शुद्ध न होई । कोटिन भांति करे जो कोई ।।

गुरु के बिना इंसान कभी निर्मल नहीं हो सकता है और निर्मल हुए बिना भक्ति संभव नहीं । मन किसी को भी अच्छा नहीं बनने देता। मन के छल, कपट के कारण ही यह दुनिया चल रही है। यदि मन निर्मल हो जाए तो दुनिया ही समाप्त हो जाएगी। यह मन कभी निर्मल नहीं होता, पर इसे काबू में करना है । गुरु के बिना यह काबू में नहीं आ सकता, इसलिए गुरु के बिना इंसान अच्छा नहीं हो सकता। गुरु की कृपा से ही मनुष्य अच्छा बनता है । गुरु अपने शिष्य को प्रदान करता है । एक बार नारद जी विष्णु महाराज के पास पहुँचे। वहाँ कुछ देर बैठने के बाद चले गये। लेकिन किसी काम से पुनः वापिस लौट आए। जब वे