करूँ जगत से न्यार
Karun Jagat Se Nyaar
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंगुरु के बहुत अधिक महत्व 'कारण' साहिब ने गुरु को परमात्मा से भी बड़ा बताकर गुरु- भक्त बनने का संदेश दिया है।
धन्य माता पिता धन्य है, धन्य सुहद अनुरक्त । धन्य ग्राम वह जानिये, जहँ जन्मे गुरु भक्त ।।
बड़े-बड़े महापुरुष, जो इस धरा पर आए, सभी के गुरु थे | राम जी आए तो वशिष्ठ मुनि उनके गुरु हुए। कृष्ण जी आए तो दुर्वासा ऋषि उनके गुरु हुए।
राम कृष्ण से को बड़ा, तिनहूँ तो गुरु कीन ।
तीन लोक के वै धनी, गुरु आगे अधीन ।।
जब इतने बड़े-बड़े महापुरुषों को गुरु की ज़रूरत पड़ गयी तो आम आदमी गुरु के बिना कहाँ जायेंगे ! इसलिए जब तक एक इष्ट नहीं मिल जाता तब तक किसी के प्रति भी आस्था बनाए रखो, लेकिन जब गुरु मिल जाए तो अन्दर से ही परमात्मा को खोजो। जैसे ‘नर्सरी' कोई वर्ग नहीं है, लेकिन प्राइवेट स्कूलों में बच्चों को इस वर्ग में भी साल-भर रहना पड़ता है। वास्तव में यह वर्ग बच्चों को स्कूल जाने का शौक पैदा करने के लिए है । इसमें बच्चों को तरह-तरह के झूले झुलाकर, उन्हें नाना तरह के खिलौनों से खुश किया जाता है ताकि उनके दिल में स्कूल आने का शौक पैदा हो सके; स्कूल के प्रति उनका मोह बन जाए। इसी तरह मंदिर आदि ईश्वर का शौक पैदा करने के लिए हैं, पर बाद में गुरु की ज़रूरत पड़ेगी-ही-पड़ेगी। यदि कोई सोचे कि वह गुरु के बिना ही भक्ति करता रहे तो फिर वह नर्सरी क्लास वाले खिलौनों में ही खुश रहना चाहता है, आगे बढ़कर लक्ष्य तक नहीं पहुँचना चाहता । अतः अध्यात्म की राह में आगे बढ़ने के लिए गुरु की खोज तो करनी ही होगी । हमें संसार में जीने के लिए पग-पग पर गुरु की ज़रूरत पड़ जाती है। पढ़ना है तो गुरु चाहिए। डॉ० बनना है तो गुरु चाहिए। बहुत सारी किताबें पड़ी हैं, पर उन्हें पढ़कर कोई डॉक्टर नहीं बना। किताबें पढ़कर कोई इंजीनियर नहीं बना। जब हम जिस दुनिया में रह रहे हैं, जो दुनिया हमारी जानी पहचानी है, वहाँ पर जीने के लिए, कुछ करने के लिए, कदम आगे बढ़ाने के लिए हमें एक गाइड की ज़रूरत पड़ जाती है, तो जिस रास्ते से हम बिलकुल भी बेख़बर