करूँ जगत से न्यार
Karun Jagat Se Nyaar
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)
पृष्ठ 238, कुल 264 में से
संदर्भ में पढ़ेंस्वस्ति कराई तबै प्रगटाना । दीर्घ रूप देखि बलि भय माना ॥
तीन पग तीनौ पुर भयऊ। आधा पाँव नृप दान न दियऊ ॥
देहु पुराय नृप पातालहिं दीन्हा । अँधा जीव छल प्रगट न चीन्हा ॥
तब लै पीठ नपाय तेहि तीन्हा । हरि ले ताहि पतालै कीन्हा ॥
यहि चर जीव देखि नहिं चीन्हा । कहै मुक्ति हरि हमको दीन्हा ॥
आधा पाँव राजा बलि नहीं दे पाया था । उसे पाताल में भेज दिया गया। साहिब कह रहे हैं कि यह संसार का अँधा जीव स्पष्ट देखकर भी कुछ नहीं समझ पाता है और कहता है कि हरि ने मुक्ति दी । ... तो हमारे नामियों की कसौटी ली जाती है। भाइयो, सच तो यह है कि काल-पुरुष आपका कुछ नहीं बिगाड़ सकता है। यदि आपको कोई दुख मिला तो वो साहिब की ही रज़ा मानना । सच है, काल - पुरुष आपको दुखी नहीं कर सकता है। वो आपको कोई कष्ट देने में सक्षम नहीं है, क्योंकि सद्गुरु की ताक़त साथ में खड़ी है; वो बचाती चलेगी। यदि कहीं कष्ट हुआ तो कहीं आप ग़लत चले होंगे, तभी सज़ा मिली होगी। पर यह सज़ा भी ऐसी होगी कि आप सहन कर सकें। लेकिन अगर आप गुरु सीढ़ी से उतर जायेंगे, अन्य - अन्य भक्तियों में लग जायेंगे, गुरु शब्द का उल्लंघन करना शुरू कर देंगे, नियमों के ख़िलाफ़ चलने लगेंगे तो फिर काल आपको घसीटकर ले जायेगा और वो ताक़त, जो आपके साथ थी, वो भी पीछे हट जायेगी ।
गुरु सीढ़ी से उतरे, शब्द बिहूना होय।
ताको काल घसीटहि, राख सकै न कोय॥
फिर उसे कोई नहीं बचा सकता है । पर यदि आप गुरु-मार्ग पर दृढ़ रहे तो काल - पुरुष का ज़ोर आप पर नहीं चलेगा। दूसरी ओर काल-पुरुष की भक्ति करने वालों को काल जो कष्ट देता है वो असहनीय होते हैं और फिर वहाँ कोई न्याय भी नहीं होता है; बिना ग़लती के भी कष्ट मिलते हैं। क्योंकि वहाँ पर आपको पिछले जन्मों के कर्मों की सज़ा भी तो मिलनी है, जबकि सद्गुरु के यहाँ पिछले कर्म ही कट जायेंगे, फिर सज़ा कैसी ! इसलिए सद्गुरु की शरण में जो सुख है, वो कहीं नहीं है। वो काल-पुरुष तो बिना ग़लती के भी कष्ट देगा। साहिब इस पर बड़ा ही प्यारा कह रहे हैं-