करूँ जगत से न्यार
Karun Jagat Se Nyaar
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंगये होंगे, कोई बेचारा अँधा हो गया होगा, कोई कॉमा में चला गया होगा, पर वो कहता है कि प्रभु ने बचा लिया। कई मरे भी होंगे, उनकी ख़बर तो उसे होगी ही नहीं । यदि पूछ लिया जाए तो कहेगा कि प्रभु ने मुक्ति दे दी। वाह! मुक्ति दे दी। यह है दुनिया । 12 अक्तूबर 2007 को अख़बार में मैंने पढ़ा कि कुछ लोग देवतों का दर्शन करने जा रहे थे तो गाड़ी खाई में गिर गयी । उसमें 40 लोग मर गये । कुछ जख्मी हो गये; उन्हें हस्पताल ले जाया गया । अब विचार करो न ! हमारी किसी से कोई दुश्मनी थोड़ा है। हमें दुख है कि इतने लोग मर गये; पर हम तो उनसे पूछना चाहते हैं, जो हमारे नामियों को कहते हैं कि बड़ा साहिब बंदगी करते रहते हो, देखो तुम्हारा लड़का बीमार हो गया । हम तो उनसे पूछना चाहते हैं जो यह कहते हैं कि बड़ा साहिब बंदगी करते रहते हो, देखो तुम्हें चोट लग गयी न, तुम्हारा नुक़सान हो गया न । तो थोड़ा विचार तो करो न ! बद्रीनाथ की तरफ जब भी बस गिरती है तो कोई नहीं बचता है; बड़े लोग मरते हैं। कई बार ऐसे हादसे हुए हैं, कई मर गये हैं, कई घायल हुए हैं। कोई नहीं कहेगा कि वहाँ जा रहे थे, इतने बड़े तीर्थ-स्थान पर जा रहे थे, किसी ने रक्षा नहीं की । पर साहिब बंदगी वाले का एक बच्चा भी बीमार हो जाए तो कहेंगे कि देवते छोड़ दिये, इसलिए बीमार हो गया। जो इतने मर गये, उसके बारे में कुछ नहीं कहेंगे। जब कुछ कहते नहीं बनेगा तो अंत में कह देंगे कि प्रभु ने मुक्ति दे दी। अर्जुन युद्ध नहीं करना चाह रहा था, क्योंकि बंधुओं का वध करना बहुत बड़ा पाप है । पर उसे करना पड़ा युद्ध । बाद में पाण्डवों को इस पाप का प्रायश्चित करना पड़ा। पहले तो यज्ञ करना पड़ा । पर उससे भी उनका पिण्डा नहीं छूटा। फिर हिमालय में जाकर गलना पड़ा। यह थी मुक्ति ! लोग उसे मुक्ति कह रहे हैं । साहिब कह रहे हैं-
बहु गंजन जीवन कहँ दीन्हा । ताको कहे मुक्ति हरि दीन्हा ॥
आगे कह रहे हैं—
बलि से तो छल कीन्ह बहूता । पुण्य नसाय कीन्ह अजगूता ॥
छल बुद्धि दीन्हे ताहिं पताला। कोई न लखै प्रपंची काला॥
लघु सरूप होय प्रथम देखाये । पृथिवी लीन्ह स्वस्ति कराये ॥