भारतकोश
करूँ जगत से न्यार

करूँ जगत से न्यार

Karun Jagat Se Nyaar

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

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तो देखो न, कैसी ली जा रही है ! आत्मज्ञान को नहीं देखा जा रहा है, भक्ति के गुणों को नहीं देखा जा रहा है, अंदर की शांति को नहीं देखा जा रहा है। यदि देखा जा रहा है तो नश्वर संसार में मिलने वाले दुखों को। यदि यह कसौटी है तो फिर महापुरुषों को तो दुख ही सहने पड़े हैं। कबीर साहिब को 52 कसनी सहनी पड़ी, गुरु नानक देव जी को जेल में जाना पड़ा, अर्जुन देव जी को तत्ते तवे पर बैठना पड़ा, पलटू साहिब को जिंदा जलाया गया । कितना कष्ट मिला ! मीराबाई को कितने कष्ट दिये गये! काल - पुरुष के इस संसार में सत्य - भक्ति का संदेश देने वाले महापुरुषों पर यदि ज़ुल्म होते आए हैं तो सत्य - भक्ति करने वालों को तो दुख मिलने ही हैं। काल - पुरुष के इस संसार से निकलकर आप अपने देश जाना चाहते हैं तो काल - पुरुष रोकने का प्रयास तो करेगा ही । यह तो एक पहलू बताया। अब दूसरा पहलू बताता हूँ । जितनी रक्षा जीव को सत्य-भक्ति में मिलती है, उसकी कल्पना भी काल-पुरुष की भक्ति करने वाला नहीं कर सकता है । जितना संरक्षण सच्चा नाम जीव को देता है, उसका लेश मात्र भी काल - पुरुष का नाम नहीं देता है । काल - पुरुष की भक्ति करने वाले जीव को आगे तो दुख भोगने ही हैं, भवसागर में फिर-फिर आना ही है, पर इस संसार में भी वो दुखी है। पहले तो उसमें अंदर की शांति नहीं होगी; फिर कोई मुसीबत आए तो सुरक्षा भी नहीं मिलेगी। क्योंकि यह काम केवल सद्गुरु करता है जबकि काल - पुरुष की भक्ति में सद्गुरु नहीं है, मात्र एक गाइड है, जो पोथियाँ पढ़कर जीवों को ईश्वर-प्राप्ति का केवल मार्ग बता रहा है। तो दूसरे पहलू में आप देखना, दुनिया में बड़ी-बड़ी घटनाएँ हो रही हैं, कई लोग मर रहे हैं, पर उनके लिए कोई कुछ नहीं कह रहा है। मैं पूछना चाहता हूँ कि यदि परमात्मा का संसार है तो वो परमात्मा रक्षा क्यों नहीं करता है! यानी उसे मंजूर है न यह सब ! धार्मिक स्थानों पर यात्रा के दौरान कई घटनाएँ हो जाती हैं और लोग बुरी तरह घायल हो जाते हैं, कई मर जाते हैं। हस्पताल में उन्हें देखने जाते वो लोग, जो हमारे नामियों की ठोकर देखकर हँसते हैं कि बड़ा साहिब बंदगी करता रहता है, कहते हैं कि प्रभु ने बचा लिया । कहीं किसी बेचारे की टाँग टूटी होगी, कहीं किसी के बाजू चले