करूँ जगत से न्यार
Karun Jagat Se Nyaar
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)
पृष्ठ 240, कुल 264 में से
संदर्भ में पढ़ेंहम भक्त भी हैं। हम कह रहे हैं कि नहीं, यह भक्ति नहीं है । लोग माँस खा रहे हैं, शराब पी रहे हैं, छल-कपट आदि कर रहे हैं और कह रहे हैं कि हम भक्त हैं । हम कह रहे हैं कि नहीं, कम-से-कम यह भक्ति नहीं है। ख़ामोशी से एक चीज़ और देख लेना कि आपका विरोध करने वाले लोग ठीक नहीं मिलेंगे; उनका खान-पान ठीक नहीं होगा, आचरण भी ठीक नहीं होगा । यह मेरा दावा है। वे छल-कपट भी कर रहे होंगे । लेकिन आपकी जीवन-शैली उत्तम है । आप माँस नहीं खा रहे हैं, चोरी नहीं कर रहे हैं, गंदे काम नहीं कर रहे हैं, घूस नहीं ले रहे हैं । फिर क्यों विरोध है आपका ? इस युग में आदमी दूसरे को कन्स्ट्रेटिली भटकाना चाहता है। कलयुग कैसा है, बताता हूँ । एक बीरपुर का रहने वाला आदमी था। उसने ईसाई धर्म को अपना लिया। उसके रिश्तेदारों ने नहीं छोड़ा उसे कुछ नहीं कहा उसे; गाँव वालों ने भी कोई नाराज़गी नहीं दिखाई । उसने माता-पिता, भाई-बहनों को भी ईसाई बना दिया । सब ईसाई बन गये। किसी ने एतराज़ नहीं किया। रिश्तेदारों ने उसके यहाँ आना- जाना नहीं छोड़ा। वो चर्च में आता-जाता था, माँस भी खाता था । कुछ हमारे नामी उसके संपर्क में आए तो बात हुई । वो सत्संग सुनने आया। वो प्रभावित हुआ; उसने नाम ले लिया। अब वो वापिस हिंदू धर्म में आ गया; माँस खाना, शराब पीना भी छोड़ दिया, गंदे काम भी छोड़ दिये । अब क्या हुआ कि रिश्तेदारों ने उसके यहाँ आना-जाना छोड़ दिया, गाँव वाले भी उससे नाराज़ हो गये । आप मानेंगे, सबने उसे छोड़ दिया । आप गौर करें। जब ईसाई बना तो गाँव वाले भी नाराज़ नहीं हुए, उसकी निंदा नहीं की, पर साहिब बंदगी में आया तो उसकी निंदा होने लगी । क्यों हुई निंदा? क्या गाँव के लोगों ने नहीं देखा कि अब यह माँस नहीं खा रहा है, चोरी नहीं कर रहा है, गंदे काम नहीं कर रहा है, झूठ नहीं बोल रहा है, अच्छा हो गया है। देखा, सबने देखा । पर फिर भी क्यों हुए नाराज़ ? यह तो बड़ी उलटी बात लग रही है । भाई, ईसाई बन गया तो कोई नाराज़ नहीं हुआ । वो तो गाय का माँस भी खा लेते हैं। पर जब साहिब बंदगी में आया तो नाराज़ हुए। ऐसा क्यों हुआ ? कोई बुरा पंथ तो है नहीं। दो बेहतरीन चीजें बोल रहे - सत्य और अहिंसा । फिर बुरे कहाँ से हैं ! तो अब निंदा होने लगी। यह बड़े