भारतकोश
करूँ जगत से न्यार

करूँ जगत से न्यार

Karun Jagat Se Nyaar

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

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का बहाना लगा देते हैं । आपका विरोध रहना - ही - रहना है, क्योंकि जब तक समाज में पाखंड है, विरोध रहना है । फिर बाकी कहीं-न-कहीं निरंजन को पकड़े हैं। मैंने आपको पीवर भक्ति दी है। आपपर निरंजन का आंतरिक हमला भी है और बाहरी भी । इसकी यह वजह रही कि नाना मत-मतान्तरों को उस तबके ने, जिसने भूत-प्रेतों के नाम पर, जादू- जड़ी के नाम पर, जिसे संत - वाणी में पाखंडी तबका कहा, अपने में विलीन कर लिया, अपने में मिला डाला। उन्हें मजबूर किया गया कि हत्या मानो; उन्हें मजबूर किया गया कि ग्रह मानो और वो झांसे में आ गये। उन्होंने स्वीकार किया। हम सावधान रहे। हमारी संगत ये चीजें नहीं मान रही है । मैंने अभियान चलाया, क्योंकि इससे भक्ति को नुक़सान होगा। हम कह क्या रहे हैं ? पहली कह रहे हैं कि सत्य ही हमारा संचेतक है। सत्य हमारा मोनो है । पहले भी कहा कि जो भी शामिल होता है, सात नियम बताते हैं । सत्य बोलना, माँस न खाना, शराब न पीना, जुआ न खेलना, चरित्रवान् रहना, हक की कमाई करना, चोरी न करना । मेरे विचार से इसमें से कोई भी नियम समाज के ख़िलाफ़ नहीं है । कोई भी नियम समाज को नुक़सान पहुँचाने वाला नहीं है । और हम समानता और मानवता की बात कर रहे हैं। कुछ पंथ जातिवाद फैलाकर कट्टारवाद फैला रहे हैं । हम यह नहीं फैला रहे हैं । एक बार एक पत्रकार ने पूछा कि आपकी उपलब्धि क्या है? मैंने कहा कि दो बड़ी उपलब्धियाँ हैं । एक तो कश्मीर से कन्याकुमारी तक साहिब की भक्ति में सभी छोटे तबके के लोग हैं। मैंने साहिब की भक्ति में 75 हज़ार ब्राह्मणों को, 75 हज़ार ठकुरों को, 75 हज़ार महाजनों को लाया है। मैंनें सबको समझा दिया कि यह भक्ति क्या है । मेरे लोग अनुकरण कर रहे हैं । उपासना की पद्धति हम एक पकड़े है। इसमें भी विरोधाभास की जगह नहीं है, कोई गुंजाइश नहीं है । जैसा कि पहले भी बताया कि समाज, धर्म और मनुष्य तीन मुद्दों पर लड़ रहा है। पहली बात यह कि दुनिया परमात्मा के रूप पर लड़ाई कर रही है । कोई कह रहा है कि शिवजी हैं; कोई हनुमान जी के लिए कह रहा है। दुनिया इस बात के लिए लड़ाई नहीं कर रही है कि परमात्मा है या नहीं। पूरा मानव- समाज स्वीकार कर रहा है। इसके लिए लड़ाई नहीं है। उसकी शक्लोसूरत पर लड़ाई है।