भारतकोश
करूँ जगत से न्यार

करूँ जगत से न्यार

Karun Jagat Se Nyaar

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

Devanagarihipublished264 पृष्ठ

पृष्ठ 258, कुल 264 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 258

किया, आपकी महिमा नहीं थी । अगर आप अपने समकक्ष देखें तो बाकी सब कुछ मान रहे हैं, बकरा भी चढ़ा रहे हैं, जादू-टोना, भूत-प्रेत भी मान रहे हैं, अन्य काम भी कर रहे हैं । मैं जो भी बात करता हूँ, सही होती है। झूठ से सावधान हूँ । माँस खाने से सेहत ख़त्म हो जाती है, झूठ बोलने से अक्ल ख़त्म हो जाती है। झूठे लोग अपने में ही उलझे रहते हैं । उनकी बातों में एकबात नहीं होती है । यहाँ पर जो पाबन्दियाँ हैं, नानी का दूध याद आ जाता है । साहिब के मार्ग में आना कोई बच्चों का खेल नहीं है । मेरा आदमी नाम लेकर झिझकेगा, भयभीत हो जायेगा। मैं जो बातें बोल रहा हूँ, अपने पर लागू करके फिर आपसे बोल रहा हूँ। तो हमारे समकक्ष चलने वाले पंथ हैं, जो समान बात कर रहे हैं । पर उनका विरोध नहीं है । आर्य समाजी देवताओं को नहीं मान रहे हैं । उनका कोई विरोध नहीं है। हमारे समकक्ष वालों का विरोध नहीं है । हमारा विरोध क्यों है ? हमने ग्रह-नक्षत्र नहीं माने, भूत-प्रेत नहीं माने, हमने जादू- -जंत्र नहीं माने ।

तंत्र मंत्र सब झूठ है, मत भरमो कोय ।

सार नाम पाय बिना, कागा हंस न होय ।।

हमने कहा कि ये नहीं मानना है । यहीं पर वो ज़्यादा आक्रांता हैं । उन्होंने महसूस किया कि ये मजबूत हैं । और मैं बहुत वज़न दे रहा हूँ इस पर । आपको एकाग्र इस बात पर नहीं कर रहा हूँ कि बहुत नाम करना, ध्यान करना। मुख्य रूप से नहीं कह रहा हूँ कि सेवा ही करना । अगर एकाग्र कर रहा हूँ तो एक ही बात पर कि नियम पर चलना, भक्ति मजबूती से पकड़ना ।

खेलना हो तो खेलिये, पक्का होकर खेल ।

कच्ची सरसों पेर के, खड़ी भया न तेल ।।

यह तबका समाज को विवश करता है। इनकी समाज में पकड़ है। ये लोग समाज में बड़े औहदे पर बैठे हैं। यह तबका ताक़त से मजबूर करता है । इसका चैनल तगड़ा है। इसलिए मैंने संगत के लिए द्वार खोला है । कभी भी फ़ोन करके पूछ लो । मेरा आदमी पाखण्डियों के निशाने पर है। वो धर्म बदलने