करूँ जगत से न्यार
Karun Jagat Se Nyaar
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंसतगुरु क्या करेगा
जब आपने नाम-दान प्राप्त किया तो क्या होगा ? गुरु क्या काम करेगा ? वर्तमान में आपकी आत्मा मन-माया के जाल में पड़कर अपने स्वरूप भूल हुई है। नाम-दान के समय एक काम सद्गुरु यह करता है कि मन और आत्मा को अलग कर देता है। वैसे आत्मा पूरे शरीर में समाई हुई है। वो उसे उठाकर आज्ञाचक्र पर एकाग्र कर देता है । इसके बाद मन चाहकर भी इसे अपने में समा नहीं सकता है। अब धीरे-धीरे शिष्य आत्मा को समझने लगता है। सद्गुरु ने यह काम किया। उसने आत्मा को कोई ताक़त नहीं दी। आत्मा किसी ताक़त की ज़रूरत नहीं है । वो परम - पुरुष की अंश होने से बड़ी ताक़तवर है। उसे किसी अतिरिक्त ताक़त की ज़रूरत नहीं है । गुरु केवल उसके ऊपर से मन-माया के आवरण को हटा देता है, जिससे उसे अपने स्वरूप को समझने का अवसर मिल जाता है । साहिब ने बड़े सुंदर अलंकार से इस तथ्य की पुष्टि की है—
बिना सतगुरु नर फिरत भुलाना ।
खोजत फिरत न मिलत ठिकाना ॥
बड़े अच्छे अलंकार से साहिब ने आत्मतत्व विस्मृत कैसे हो गया, यह बताया है । अपनी ताक़त यह कैसे खो दिया है, यह बता रहे हैं । कह रहे हैं कि बिना सच्चे सद्गुरु के यह भूला हुआ है ।
के हर सुत इक आन गड़रिया ।
पाल पोस के कियो सयाना ॥
'केहर' शेर को कहते हैं । 'सुत' बच्चे को कहते हैं । एक बार एक शेर का बच्चा बक्करवाल की बकरियों में आ गया। वो अपनी माँ से बिछड़ गया । बक्करवाल उसे उठाकर ले गया ।
पाल पोस के कियो सयाना ॥
माँ से बिछड़ा हुआ था। माँ नहीं मिली। अब वो भेड़-बकरियों के साथ रहने लगा।