करूँ जगत से न्यार
Karun Jagat Se Nyaar
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंकी विधि ही यही है। वो ऐसे ही दिया जाता है। यही सिस्टम है नाम का। क्योंकि वो किरणें शिष्य को प्रदान करनी हैं । एक शराबी मेरे पास आया, थोड़े दिन हुए थे शराब छोड़े; कहा नाम दो। मैंने कहा कि अभी थोड़ा कण्ट्रोल करो, बाद में दूँगा। बाद में वो किसी दूसरे महात्मा से नाम लेकर आया, अपने ही गुरु को गालियाँ देने लगा, कहने लगा कि मैं शराब में धुत था तो नाम दे दिया। क्या ऐसे देते हैं नाम ! मुझे तो पता भी न चला कुछ। यानी गुरु जी को शिष्य की कुछ ख़बर ही नहीं थी कि क्या मामला है । तभी कहा – 'पानी पीजिये छानि के, गुरु कीजे जानि के ॥' गुरु जी तो बस अपनी संख्या बढ़ाने में लगा था। मैं समाज को कह रहा हूँ कि ऐसे लोगों से सतर्क रहो, जिनको आपकी ख़बर ही नहीं है कि क्या कर रहे हैं आप। यदि गुरु जी को आपके पाप कर्मों की ख़बर नहीं है तो फिर वो आपका कल्याण भी नहीं कर पायेगा, क्योंकि जब काल आपकी आत्मा को लेने आयेगा तो भी उसे ख़बर न होगी और वो आपको कहीं भी जाकर पटक देगा। आपका वो पाखण्डी गुरु आपको काल से बचा नहीं पायेगा । इसलिए पूर्ण गुरु की खोज करनी होगी। साहिब के ये शब्द याद रखने होंगे-
भृंग मता होय जिहि पासा । सोई गुरु सत्य धर्मदासा ॥
काग पलट हंसा कर दीना ।
ऐसा नाम सतगुरु मैं दीना ॥