करूँ जगत से न्यार
Karun Jagat Se Nyaar
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंजो आपको कह रहा है कि कुछ कर, कमाई कर, समझना कि वो संत नहीं है, संत वेश में कोई पाखण्डी है, जिसे यथार्थ ज्ञान कुछ भी नहीं है, केवल किताबों से पढ़कर सुना रहा है। संत तो सक्षम होता है, पर वो अक्षम है; संत आँखों देखी वाली बात करता है, वो किताबों वाली बात कर रहा है; संत यथार्थ में अमर - लोक से होकर आते हैं, उसने कभी अमर-लोक सपने में भी नहीं देखा है । यदि सपने में भी देखा होता तो जान जाता कि अपनी ताक़त से नहीं देखा, कोई दिखा गया। यह पक्की बात है कि सपने में भी अमर - लोक नहीं देखा जा सकता है। फिर वहाँ पहुँचना तो बड़ी दूर की बात है । इसलिए जिसके पास भृंग मते वाली थ्यूरी नहीं है, वो आपका बहुत बड़ा बैरी है, क्योंकि आपको धोखे में रखे हुए हैं। इस बात को अपने दिल में गहराई से उतार लेना कि वो आपका सर्वनाश करने पर तुला है, जो कह रहा है कि कुछ कमाई कर, कुछ साधना कर, तभी कुछ होगा। क्योंकि उस पाखण्डी को पता नहीं है कि- -
ना कुछ किया ना करि सका, ना करने योग शरीर ।
जो कुछ किया साहिब किया, भया कबीर कबीर ॥
जो कमाई करने को कह रहा है, इसका सीधा सा मतलब है कि वो कहना चाह रहा है कि उसने भी अपनी कमाई से ही सब कुछ हासिल किया है । इससे स्पष्ट हो जाता है कि वो कभी अमर - लोक गया ही नहीं है । उसका गुरु भी संत नहीं हो सकता है। यदि होता तो वो ऐसी बात नहीं करता । कहीं से भी उसका मत संत-मत नहीं है, कहीं भी उसका मत भृंग-मत नहीं है। वो एक झूठा है, जो अपने साथ-साथ आपको भी भवसागर में डुबाने में लगा हुआ है। उसका मुद्दा केवल धन कमाना हो सकता है, आपकी मुक्ति नहीं । हमारे देश में शीश पर हाथ रखकर नाम दिया जाता है । कोई कहता है कि हमें गुरु जी ने माइक पर नाम दिया, कोई कहता है कि टी. वी. पर दिया। नहीं, नाम ऐसे नहीं दिया जाता। एक ने मुझसे भी पूछा कि यदि आपको हज़ार आदमी को एक साथ नाम देना पड़ेगा तो क्या तब भी ऐसे ही शीश पर हाथ रखकर देंगे? मैंने कहा कि यदि एक लाख आदमी को भी नाम देना पड़ा तो ऐसे ही दूँगा, क्योंकि नाम देने