करूँ जगत से न्यार
Karun Jagat Se Nyaar
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंअनहित सबमें उसी की रज़ा मानना । ...तो कहने का भाव है कि सब कुछ वही करेगा, तुम्हें कुछ नहीं करना है । आप ही हम बह जायेंगे, जो न सुरति करौ मम साईंया, हम हैं
भवजल माहिं ।
गहोगे बाहिं ॥
अर्थात साहिब ने इंगित किया कि वो अविलंब बदल देगा । कैसा बना देगा? स्वयंमय बना देगा | यही कह रहे हैं कि परिश्रम करने की ज़रूरत नहीं है। दुनिया में अनेक गुरु हैं जो कहते हैं कि आपको पार कर देंगे, पर जब उनके लोगों को देखते हैं तो पता चलता है कि उनमें कोई बदलाव नहीं है । यानी वे सच्चे गुरु नहीं हैं। इसलिए साहिब ने सतर्क करते हुए कहा-
भृंग मता होय जिहि पासा । सोई गुरु सत्य धर्मदासा ॥
जैसे भृंगा कीट के बिना प्रयास के उसे बदल देता है, ऐसे ही शिष्य की चेष्टा बिना ही यह काम गुरु कर देता है। आप नहीं देख रहे हैं अपने बच्चों को कि उनमें आपकी आदतें आ रही हैं। यह आपका एक शुक्राणु है । गुरु की सुरति शिष्य की आत्मा तक पहुँची। उसमें सब चीज़ें सहज ही आ गयीं। फिर काम, क्रोध नहीं लगेगा। साहिब ने ऐसे गुरु के लिए कहा कि जो भृंग की तरह बदलने की क्षमता रखता हो । 'गुरु मिलने से झगड़ा ख़त्म हो गया॥' अध्यात्म की खोज समाप्त हो जाती है। योग में यह प्रावधान नहीं है। सहज मार्ग क्या है ? पूरी जिम्मेदारी गुरु की है। आपकी मोह- माया हटती जायेगी, आपके अंदर के विकार समाप्त होते जायेंगे, एक चौकीदार आपकी सुरक्षा के लिए खड़ा रहेगा हमेशा । 'मेरा हरि मौको भजे, मैं सोऊँ पाँव पसार ॥ ' वाली बात हो जायेगी । यह है – सहज- मार्ग । तुम्हें कुछ नहीं करना है। यह है – भृंग मता । - गुरु को कीजे दण्डवत्, कोटि कोटि प्रणाम ।
कीट न जाने भृंग को, करिले आप समान॥
आदमी तो शंका में है कि हमें क्या करना है । कोई कुछ कह रहा है, कोई कुछ। अपनी ताक़त से आप माया को नहीं छोड़ सकते हैं। गुरु नाम की ताक़त खुद यह काम करेगी।