करूँ जगत से न्यार
Karun Jagat Se Nyaar
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)
पृष्ठ 22, कुल 264 में से
संदर्भ में पढ़ेंऐसे ही गुरु शब्द सुखदाई है । भृंगे की भू-भू की प्रकिया में स्पन्दन है। कुछ कीट पहले में नहीं हो पाते हैं परिवर्तित । क्यों नहीं हुए? क्योंकि समर्पित नहीं होते । जब तक समर्पित होकर नहीं सुनता, उसका परिवर्तन नहीं हो पाता। फिर तीन बार में भी न हो तो भृंगा उसे छोड़ देता है, दूसरे को ढूँढ़ता है तो पुनि कीट आसरे रहई .. फिर नहीं बन पाता है वो भृंगा, कीट ही रह जाता है। उसने सहमति नहीं दी। यह सहमति साधारण नहीं है ।
पहले दाता शिष्य भया, जिन तन मन अरपा शीश ।
पीछे दाता सतगुरु भया, जिन नाम दिया बखशीश ॥
सभी सहज-मार्ग, सहज - मार्ग कहे जा रहे हैं, पर कमाई - कमाई क जा रहे हैं । ये दो पहलू हैं । साहिब कह रहे हैं कि तुम्हें कुछ भी नहीं करना है, सद्गुरु सभी चीजें उत्पन्न कर देगा । ये चीजें अपने-आप आपमें आती जायेंगी । ज्ञान भी खुद ही आ जायेगा, भक्ति भी खुद ही आ जायेगी, मन पर कण्ट्रोल भी खुद ही आ जायेगा, रूहानियत भी खुद ही आ जायेगी, शक्तियाँ भी खुद ही आती जायेंगी। आप कहेंगे कि हम नहीं करेंगे तो कैसे होगा ! यह जो 'हम' है, इसे संचालित कौन कर रहा है नाम के बाद ! गुरु की ताक़त ही इसका संचालन कर रही है, इसलिए अपनी 'मैं' नहीं लाना बीच में, केवल सहमति रखना । एक ने कहा कि यदि गुरु की कृपा से ही सब होता है तो जो हम ठगी कर रहे हैं, वो भी उसकी ही इच्छा से होता होगा । मैंने कहा – सुन, पूरा-पूरा जबाव दूँगा। यह तब होता है जब हम पूर्ण रूप से समर्पित नहीं हो जाते हैं । आप जब पूर्ण रूप से समर्पित हो जाते हैं तब चाहकर भी ग़लत नहीं कर पायेंगे। अभी आप प्रभु के भरोसे चल रहे हैं, प्रारब्ध आपका संचालन कर रहा है, कर्मानुसार आपको फल मिलेगा। मान लो कि कुँए में गिरना होगा तो पक्का गिरोगे। पर जब सद्गुरु पर आश्रित होते हैं सद्गुरु कर्म को एक तरफ कर देते हैं। वो घटना टल जाती है।
कोटि कर्म पल में कटे, जो आवे गुरु ओट ॥
जो भी काम करेंगे, जो भी नुकसान या अहित होने वाला होगा, वहाँ गुरु की ताक़त रक्षा करेगी। जो भी होगा वो हित में ही होगा। इसलिए हित-