करूँ जगत से न्यार
Karun Jagat Se Nyaar
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंलंगूर छलाँग मार रहे थे, वो भी मार रहा था । इतना तेज़ कोई आदमी पेड़ों में नहीं जा सकता है। वो लंगूरों के साथ लंगूर हो गया था। जहाँ लँगूर जाएँ, वो भी चला जाता था । अव सवाल उठा कि वो कैसे लंगूर बन गया ? था वो आदमी। 2-3 चीजें हैं। पहली बात है कि 90 प्रतिशत मेलजोल है। आदमी की 90 प्रतिशत आदतें मिलती हैं। पर टेक्निकॅल् कारण कुछ और है। वो क्यों छलाँगें मार रहा था? क्योंकि फल खाने और दूध पीने से उसका शरीर लचीला हुआ। छोटेपन ही लंगूरन उठाकर ले गयी होगी और उसे ममता दे दी होगी, अपना दूध पिला दिया होगा । मैंने अखबार में पढ़ा कि एक कुत्तिया कूड़े के ढेर पर पड़े हुए छोटे- से बच्चे को रोज़ दूध पिलाने जाती थी । किसी ने बच्चे को कूड़े के ढेर पर फेंक दिया था। कुतिया ने सोचा होगा कि कचरे में पड़ा है। वो रोज़ दूध पिलाने जाती थी। उसका टॉइटल भी था - कुतिया की ममता । संभवता लंगूरनी ले गयी होगी और प्यार दे दिया होगा। बच्चे ने भी उसे ही अपनी माँ समझ लिया होगा । जैसे कोई बच्चा अपनाते हैं तो वो तो उन्हें ही अपने माता-पिता समझता है न! ऐसा ही हुआ होगा। अब धीरे-धीरे उसे सब सिखा दिया होगा । पर उसके शरीर का ढाँचा आदमी की तरह था । दूध पीने और फल खाने से आदमी तेज़ होगा । पर यह नहीं कह रहा हूँ कि अनाज नहीं खाना। क्योंकि लोग मेरी बात को उलट-पुलट कर देते हैं। एक दिन मुझे किसी ने कहा कि गाय माता है तो भैंस क्या है? लोग सवाल पूछते हैं। भैंस की दो चीज़ें उसे थोड़ा किनारा कर रही हैं। भैंस पहले अपना शरीर बनाती है, पर गाय जितना खिलाओ, वापिस कर देती है । पर ईमानदारी से देखें तो-
जिसका पीजिए दूध, तिसको कहिये माय ॥
इसलिए सभी की रक्षा करनी है । तो वो बच्चा लंगूर हो गया। वो इंसान से किनारा करता गया । लंगूर बन गया। छलाँगें इसलिए मार रहा था कि दूध वही पिया, जीनस् आ गये। लंगूरों के टोले में भाषा भी सीख गया। बच्चों की याददाश्त भी बड़ी तेज़ होती है।