करूँ जगत से न्यार
Karun Jagat Se Nyaar
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंहै, उसकी मादा नहीं है । फिर वो बड़े प्यारे तरीके से अपनी पीढ़ी चलाता है। वो कीड़े को पकड़ अपनी आवाज़ सुनाता है और अपनी तरह कर लेता है। साहिब कह रहे हैं कि इस तरह गुरु भी अपनी तरह कर लेता है । प्रमाण मिल रहे हैं। जब भी आप अपने व्यक्तित्व को देख रहे हैं तो बहुत बड़ा बदलाव मिल रहा है। कभी अपने में बदलाव देख अचरज होता होगा आपको । एक दिन अवतार सिंह ने कहा कि मुझे लगता था कि मुझसे बुरा कोई नहीं है दुनिया में, सभी गलत काम कर लेता था मैं, पर अब लगता है कि मुझसे अच्छा कोई नहीं है। मैं बदल गया हूँ । कहा- अगर मैं कई जन्म तपस्या भी करता तो भी शायद इतना नहीं बदल सकता था । साहिब सच ही तो कह रहे हैं- सतगुरु मोर रंगरेज, चुनरि मोरि रंग डारी....... आपको बदल दिया। फिर वाणी में आ रहा है-
जब मैं था तो गुरु नहीं, अब गुरु हैं मैं नाहिं ।
प्रेम गलि अति साँकरी, तामें दो ना समाहिं ॥
आख़िर क्या करते हैं गुरुदेव ? आप हम सब वैज्ञानिक युग में जी रहे हैं। क्लोन्स बन रहे हैं। बकरी के क्लोन्स, इंसान के क्लोन्स, पर वो हमारे बाहरी रूप को बदल रहे हैं, स्वभाव को नहीं बदल पा रहे हैं । यह वैज्ञानिकों की पकड़ से बाहर है। फिर क्या है संत के पास, जो वो बदलने में सक्षम है। पारस सुरति संत के पास ........ उनकी सुरति में एक ताक़त है । जैसे सीपी में स्वाति की बूँद को मोती में बदलने की ताक़त है। उसके पेट में यह सिस्टम है। पर पानी की बूँद को मोती बनाना वैज्ञानिकों के बस की बात नहीं है। किसी ने आज तक यह काम नहीं किया है। यह काम एक वैज्ञानिक नहीं कर सकता है । उसके बस की बात नहीं है। मृगा की नाभि में सिस्टम है कि वो कस्तूरी का सृजन करता है । कस्तूरी मृगा का वीर्य है। वो कस्तूरी में बदल जाता है। पर अभी तक कोई केमिकल्स से कस्तूरी नहीं बना पाया है। इस तरह एक महापुरुष की सुरति के अंदर ताक़त है कि आपको बदल सकता है । क्या है ध्यान ? यह ध्यान ही आत्मा है। जब वहाँ पहुँचती है तो बाकी सब कुछ छूट जाता है, कुछ बचता है तो ध्यान, सुरति बचती है। वो परमात्मा के सम्मुख पहुँचती है, भौतिक शरीर छूट जाता है। वो उसका विषय नहीं है, उसमें वहाँ पहुँचने की ताक़त नहीं है।