कथासरित्सागर : प्रथम खण्ड (लम्बक १ से ५)

कथासरित्सागर : प्रथम खण्ड (लम्बक १ से ५)
महाकवि सोमदेव भट्ट द्वारा
स्रोत: कथासरित्सागर : प्रथम खण्ड (लम्बक १ से ५) · बिहार राष्ट्रभाषा परिषद्, पटना · 1960 (उद्गम)
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`ततः प्रव्राजिकावादीत् सिद्धद्वीपान्तरागता ।` *इह स्थिता वणिक्पुत्रास्तर्हि तानानयामि ते ॥१३८॥*`इत्युक्त्वा सा प्रमुदिता ययौ प्रव्राजिका गृहम् ।` *सा च देवस्मिता स्वैरं स्वचेटीरित्युमापत ॥१३९॥-> Wait,स्वचेटीरित्युमापत? No,स्वचेटीरित्युवाच ह? Let's look:स्वचेटीरित्युमापत? No,स्वचेटीरित्युवाच ह? Let's look at the letters:स्वचेटीरित्युमापत? No,स्वचेटीरित्युवाच ह? Let's look at the letters:स्वचेटीरित्युमापत? No,स्वचेटीरित्युवाच ह? Let's look at the letters:स्वचेटीरित्युमापत? No,स्वचेटीरित्युवाच ह? Let's look at the letters:स्वचेटीरित्युमापत? No,स्वचेटीरित्युवाच ह? Let's look at the letters: `स्वचेटीरित