कथासरित्सागर : प्रथम खण्ड (लम्बक १ से ५)

कथासरित्सागर : प्रथम खण्ड (लम्बक १ से ५)
महाकवि सोमदेव भट्ट द्वारा
स्रोत: कथासरित्सागर : प्रथम खण्ड (लम्बक १ से ५) · बिहार राष्ट्रभाषा परिषद्, पटना · 1960 (उद्गम)
DevanagariHindipublished876 पृष्ठ
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तृतीय लम्बक ४७ इस प्रकार वह नीतिनिपुण राजा वत्सराज समस्त संसार को जीतकर रुमन्वन् और यौगन्धरायण को राज्य का भार सौंपकर पद्मावती और वासवदत्ता के साथ स्वच्छन्द बिहार करने लगा ।।२२ ॥ कीर्ति और श्री के समान उन दोनों देवियों के बीच में बैठा वह वत्सराज श्रेष्ठ चारणों से प्रशंसित अपने यश के समान उज्ज्वल चन्द्रोदय का आनन्द लेता हुआ शत्रु के प्रताप के समान मद्य का निरन्तर पान करने लगा ॥२३ ॥ छठा तरंग समाप्त कथासरित्सागर का लावानक नामक तृतीय लम्बक समाप्त