भारतकोश
कौषीतकि ब्राह्मणोपनिषद् (हिन्दी अनुवाद सहित)

कौषीतकि ब्राह्मणोपनिषद् (हिन्दी अनुवाद सहित)

Kaushitaki Brahmana Upanishad with Hindi Translation

स्वामी महेश्वरानन्द गिरि द्वारा

स्रोत: मेहता चैरिटेबल ट्रस्ट दिल्ली · मेहता चैरिटेबल ट्रस्ट दिल्ली (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished56 पृष्ठ

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११ सबसे पहिचाना जाता है। इस प्रकार का सब विश्व है। तू भी सर्व रूप है, इस प्रकार के वेद के मंत्र से कहा जाता है॥२५॥ यजूंदरः सामशिरा असावृङ्‌मूर्तिरव्यः। स ब्रह्मेति हि विज्ञेय ऋषिर्ब्रह्ममयो महानिति।। तमाह केन पौंसनानि नामान्याप्नोतीति प्राणनेति।।२६।। यजुष् उदर रूप हैं साम मस्तक रूप है। ऋक् उसकी मूर्ति रूप है इस प्रकार अक्षर ब्रह्म है, उसको ऋषि ब्रह्ममय अथवा महान् रूप से जाने। ब्रह्म उससे पूछता है "मेरे पुलिंग नाम तूने किस प्रकार प्राप्त किये?" वह उत्तर देता है "प्राण से।" ॥२६॥ ब्रूयात्केन स्त्रीनामानीति वाचेति केन नपुंसकनामानीति मनसेति केन गन्धानिति घ्राणेनेति ब्रूयात्केन रूपाणीति चक्षुषेति केन शब्दानिति श्रोत्रेणेति केनान्नरसानिति ।।२७।। "मेरे स्त्री लिंग कें नाम किस प्रकार प्राप्त किये?" तब कहता है "वाणी से"। "मेरे नपुंसक नाम किस प्रकार प्राप्त किये" तब कहता है "मन से"। गंध किससे? "घ्राणेन्द्रिय से"। "रूप किससे?" चक्षु से"। "शब्द किससे?" "श्रोत्रेन्द्रिय से"। "अन्न का रस किससे?" ।।२७।। जिह्वयेति केन कर्माणीति हस्ताभ्यामिति केन सुखदुःखे इति शरीरेणेति केनानन्दं रतिं प्रजातिमित्युपस्थेनेति केनेत्या इति पादाभ्यामिति केन धियो विज्ञातव्यं कामानिति प्रज्ञयेति प्रब्रूयात् ।।२८।। "जिह्वा से"। "कर्म किससे"? "हाथों से"। "सुख दुख किससे?" "शरीर से"। "आनन्द रति और प्रजा किससे?" "उपस्थेन्द्रिय से"। "गति किससे?" "पग से"। "बुद्धि किससे पहिचानती है?" "प्रज्ञा