भारतकोश
कौशिक गृह्यसूत्रम् (अथर्ववेद शौनक शाखा - संक्षिप्त टीका एवं पं. उदयनारायण सिंह हिन्दी अनुवाद)

कौशिक गृह्यसूत्रम् (अथर्ववेद शौनक शाखा - संक्षिप्त टीका एवं पं. उदयनारायण सिंह हिन्दी अनुवाद)

Kausika Grihyasutram of Atharvaveda with Hindi Translation

महर्षि कौशिक (अनुवादक: पण्डित उदयनारायण सिंह) द्वारा

DevanagariHindipublished361 पृष्ठ

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। कौशिकगृह्यसूत्रकी ⮞ विषय-सूची ⮜ अध्याय ॥ १ ॥ कं. सूत्र पृष्ठ १-१-३७ वेद तथा ब्राह्मण ग्रंथों से संस्कार, पाकयज्ञ, देवयज्ञ, १-३ पितृयज्ञादिक निकले हैं । पाकयज्ञ की परिभाषा, बैल के चर्म पर बैठना । २-१-४१ उपकरणों को वेदी के पास रखने का नियम उनको यथा ४-७ नियम साफ करना, प्रोक्षण करने की रीति, हवन की विधि । ३-१-२० इध्मों का आधान, अभिमन्त्रण, अभिषेचनादि, ब्रह्मा के ७-९ कर्त्तव्य राजकर्म, आभिचारिक कर्मों में विशेषता । ४-१-१९ वेदी के किस भाग में कौन २ सी आहुतियां देनी । ९-११ अवदान की प्रक्रिया, आहुतियों की देवता, उनके नाम, विभिन्न आपत्तियों के फल । ५-१-१३ अमावास्या, पौर्णमासी को होम करने की रीति । ११-१३ ६-१-३७ आज्य की अस्स्रुति द्वारा स्कन्न होम, अस्स्रुति होम, १३-१६ संस्थित होमादि, दर्श एवं पौर्णमास का व्याख्यान । ७-१-२९ स्थालीपाक की विधि में अश्नामि या आशयति करको कहा १६-१८ गया है, वहाँ २ स्थालीपाक की विधि समझना । जुहोति से घृत जानना । यह आहुति पदार्थ का विशेष नियम है । उदक से जलपात्र, अनुपदिष्ट की जगह आज्य काष्ठ अनुप- दिष्ट होने से । भक्षयति से पुरोडाश, प्रयच्छति से मन्थ एवं ओदन और उदक संस्कार कथन से जलपात्र समझना । ८-१-३५ पुरस्तात् होम के निशा कर्मों के नियम, विधि कर्मों में १८-२० जलक्रिया तीन २ करना, विभिन्न सूत्रों के विनियोग दशा में नियम प्रयच्छाञ्च परशुं से कुश काटने का अस्त्र देना । कर्म, अभिचारकर्म इनकी सामग्रियों, वास्तोष्पतीय, मातृ- नामादि की परिभाषा ।

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