भारतकोश
कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा

DevanagariSanskritpublished918 पृष्ठ

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विषयपृष्ठ
४ : युद्धयोग्य भूमि और पदाति, अश्व, रथ तथा हाथी आदि सेनाओं के कार्य६५१
५ : पक्ष, कक्ष तथा उरस्य आदि विशेष व्यूहों का सेना के परिणाम के अनुसार व्यूह विभाग, सार तथा फल्गु वलों का विभाग और चतुरङ्ग सेना का युद्ध६५५
६ : प्रकृतिव्यूह, विकृतिव्यूह और प्रतिव्यूह की रचना६६२

( ११ ) वृत्तसंघ : ग्यारहवाँ अधिकरण

१ : भेदक प्रयोग और उपांशुदण्ड | ६६९

( १२ ) आबलीयस : बारहवाँ अधिकरण

१ : दूतकर्म | ६७९ २ : मन्त्र-युद्ध | ६८३ ३ : सेनापतियों का वध और राजमण्डल की सहायता | ६८८ ४ : शस्त्र, अग्नि तथा रसों का गूढ़ प्रयोग और वीवध, आसार तथा प्रसार का नाश | ६९२ ५ : कपट उपायों या दण्ड-प्रयोगों द्वारा और आक्रमण के द्वारा विजयोपलब्धि | ६९६

( १३ ) दुर्गलम्भोपाय : तेरहवाँ अधिकरण

१ : उपजाप | ७०५ २ : कपट उपायों द्वारा राजा को लुभाना | ७०६ ३ : गुप्तचरों का शत्रु-देश में निवास | ७१५ ४ : शत्रु के दुर्ग को घेरकर अपने अधिकार में करना | ७२२ ५ : विजित देश में शान्ति की स्थापना | ७३१

( १४ ) औपनिषदिक : चौदहवाँ अधिकरण

१ : शत्रु-वध के प्रयोग | ७३७ २ : प्रलम्भन योग में अद्भुत उत्पादन | ७४४ ३ : प्रलम्भन योग में औषधि तथा मन्त्र का प्रयोग | ७५१ ४ : शत्रु द्वारा किये गये घातक प्रयोगों का प्रतीकार | ७६०

( १५ ) तन्त्रयुक्ति : पन्द्रहवाँ अधिकरण

१ : अर्थशास्त्र की युक्तियाँ | ७६५ चाणक्य-सूत्र | ७७५ पारिभाषिक शब्दकोश | ८०१ शब्द-सूची | ८१७

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