केनोपनिषद् (पदभाष्य व वाक्यभाष्य सहित)

केनोपनिषद् (पदभाष्य व वाक्यभाष्य सहित)
Kena Upanishad with Pada & Vakya Bhashya
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished152 पृष्ठ
पृष्ठ 14, कुल 152 में से
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६ $\qquad\qquad\qquad\qquad$ केनोपनिषद् $\qquad\qquad\qquad\qquad$ [ खण्ड १
पद-भाष्य
| संस्कृत मूल | हिन्दी अनुवाद |
|---|---|
| श्रुत्या प्रदर्श्यते 'केनेषितम्' | श्रुतिद्वारा दिखलायी जाती है। |
| इत्याद्यया । काठके चोक्तम् | कठोपनिषद्में तो कहा है— |
| “पराञ्चि खानि व्यतृणत्स्वयम्भू- | “स्वयम्भू परमात्माने इन्द्रियोंको |
| स्तस्मात्पराङ् पश्यति नान्त- | बहिर्मुख करके हिंसित कर दिया |
| रात्मन्। कश्चिद्धीरः प्रत्यगात्मा- | है; इसलिये इन्द्रियाँ बाहरकी ओर |
| नमैक्षदावृत्तचक्षुरमृतत्वमिच्छन्” | ही देखती हैं, अन्तरात्माको नहीं |
| (क०उ० २।१।१) इत्यादि । | देखतीं; किसी-किसी बुद्धिमान्ने |
| “परीक्ष्य लोकान्कर्मचितान्ब्राह्मणो | ही अमरत्वकी इच्छा करते हुए |
| अपनी इन्द्रियोंको रोककर | |
| प्रत्यगात्माका साक्षात्कार किया है” | |
| इत्यादि । तथा अथर्ववेदीय (मुण्डक) | |
| उपनिषद्में भी कहा है—“ब्रह्मनिष्ठ | |
| पुरुष कर्मद्वारा प्राप्त होनेवाले |
वाक्य-भाष्य
| संस्कृत मूल | हिन्दी अनुवाद |
|---|---|
| इत्यनारम्भ एव कर्मणः श्रेयान् । | उक्तिके अनुसार कर्मको आरम्भ न |
| अल्पफलत्वादायासबहुलत्वात् | करना ही उत्तम है क्योंकि वह अल्प |
| तत्त्वज्ञानादेव च श्रेयःप्राप्तेः | फलवाला और अधिक परिश्रमवाला |
| इति चेत् । | है तथा आत्यन्तिक कल्याण तत्त्व- |
| विज्ञानसे ही होता है। |
| (पार्श्व-टिप्पणी) | संस्कृत मूल | हिन्दी अनुवाद |
|---|---|---|
| सत्यम्; एतदविद्याविषयं | सिद्धान्ती-ठीक है, परन्तु यह | |
| चित्तशुद्धये | कर्माल्पफलत्वादि- | अविद्यामूलक कर्म “जो भोगोंकी |
| कर्मावश्यकम् | दोषवद्बन्धरूपं च | कामना करता है” तथा “इस प्रकार |
| प्राप्तज्ञानस्य तु | सकामस्य “कामान् | जो कामना करनेवाला है” इत्यादि |
| तदनारम्भः | यः कामयते” (मु०उ० | श्रुतियोंके अनुसार सकाम पुरुषके लिये |
| ३।२।२) “इति नु कामयमानः” | ही अल्पफलत्वादि दोषोंसे युक्त तथा | |
| इत्यादिश्रुतिभ्यः; न निष्कामस्य । | बन्धनकारक है; निष्काम पुरुषके लिये | |
| तस्य तु संस्कारार्थान्येव कर्माणि | नहीं। उसके लिये तो कर्म अपने | |
| निर्वर्तक (निष्पन्न करनेवाले) और | ||
| आश्रयभूत प्राणोंके विज्ञानके सहित |