भारतकोश
कुलार्णव तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

कुलार्णव तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Kularnava Tantra with Hindi Commentary

भगवान शिव / पं. भद्रशील शर्मा द्वारा

स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished84 पृष्ठ

पृष्ठ 45, कुल 84 में से

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साधनमाला ३६ पूजागृह से बाहर या भीतर एक त्रिकोण बनाकर गन्ध- पुष्पाक्षतों से शिष्य उच्छिष्टभैरव का ध्यान करे— गदात्रिशूलडमरुपात्रहस्तं त्रिलोचनम् । कृष्णाभं भैरवं ध्यायेत् सर्व्वाविघ्नंनिवारणम् ॥ इसके बाद 'ॐ ॐ ॐ डांउच्छिष्टभैरव एहि एहि बलिं गृह्ण गृह्ण फट् स्वाहा' से बलि प्रदान करे। फिर शान्तिस्तव का पाठ कर अलविन्दुओ से तर्पण करे। यथा— यजन्ति देव्यो हरपादपङ्कजं प्रसन्नवामस्थितमोक्षदायकम्। अनन्तसिद्धान्तमतिप्रबोधकं नमामि चक्राष्टकयोगिनीशम् ॥ योगिनीचक्रमध्यस्थं मातृमण्डलवेष्टितम् । नमामि शिरसा नाथं भैरवं भैरवीप्रियम् ॥ अनादिघोरसंसारपरिक्ष्वंसैकहेतवे । नमः श्रीनाथवेद्याय कुलौषधिविधायिने ॥ आपदो दुरितं रोगाः समयाचारलङ्घनात् । तत्सर्वाणि व्यपोहन्तु दिव्य वक्रस्य मेलनात् ॥ नन्दन्तु साधककुलान्यलिमात्मनिष्ठाम् पापा जहन्तु समयाद्दिशि योगिनीनाम् । सा शाम्भवी स्फुरतु कापि ममाप्यवस्था यस्यां गुरोश्चरणपङ्कजमेव सेव्यम् । नन्दन्तु सिद्धगुरवस्तदनुक्रमौघाः ज्येष्ठाऽनुगाः समयिनो वटुकाः कुमार्य्यः । यद्योगिनीप्रवरवीरकुलप्रसूता आचार्य्य भूमिपतयो द्विजसाधुलोकाः ॥ नन्दन्तु साधुकुलधर्मरताः परे ये चान्ये विशेषपदभेदकशाम्भत्राय ॥

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