भारतकोश
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

माधवकर द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ

पृष्ठ 113, कुल 404 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 113

भाषाटीकासमेत । (९५) पञ्च कासाः स्मृता वातपित्तश्लेष्मक्षतक्षयैः । क्षयायोपेक्षिताः सर्वे बलिनश्चोत्तरोत्तरम् ॥ ३ ॥ वात, पित्त, कफ, क्षत और क्षय ऐसे पांच प्रकारकी खांसी होती है इनकी औषध न करे तो सर्वका क्षयरूप हो जाता है। ये उत्तरोत्तर बलवान् जाननी जैसे वातसे पित्तकी, पित्तसे कफकी, कफसे क्षतकी, क्षतसे क्षयकी खांसी प्रबल है ॥ कासका पूर्वरूप । पूर्वरूपं भवेत्तेषां शूकपूर्णगलास्यता । कण्ठे कण्डूश्च भोज्यानामवरोधश्च जायते ॥ ४ ॥ मुख और गलेमें कांटेसे पडजायँ तथा कण्ठमें खुजली चले, भोजन करा न जाय ये खांसी होनेवालेके लक्षण हैं ॥ वातकी खांसीके लक्षण । हृच्छङ्खसूर्धोदरपार्श्वशूली क्षामाननः क्षीणबलस्वरौजाः । प्रसक्तवेगस्तु समीरणेन भिन्नस्वरः कासति शुष्कमेव ॥ ५ ॥ हृदय, कनपटी, मस्तक, उदर, पसवाडा इनमें शूल चले, मुँह उतर जाय, बल, स्वर, पराक्रम ये क्षीण पडजायँ, वारम्वार खांसीका उठना, स्वरभेद और सूखी खांसी उठे ये वातकी खांसीके लक्षण हैं ॥ पित्तकी खांसीके लक्षण । उरोविदाहज्वरवक्त्रशोषैरभ्यर्दितस्तिक्तमुखस्तृषार्तः । पित्तेन पीतानि वमेत्कटूनि कासेत्स पाण्डुः परिदह्यमानः ॥६॥ पित्तकी खांसीके हृदयमें दाह, ज्वर, मुखका सूखना इनसे पीडित हो, मुख कडुवा रहे, प्यास लगे, पीले रंगकी और कडुवी ऐसी पित्तके प्रभावसे वमन हो खांसीके समय रोगीका पीला वर्ण हो जाय और सब देहमें दाह होय ॥ कफकी खांसीके लक्षण । प्रलिप्यमानेन मुखेन सीदञ्छिरोरुजार्तः कफपूर्णदेहः । अभक्तरुग्गौरवकण्डुयुक्तः कासेद्भृशं सान्द्रकफः कफेन ॥ ७ ॥ कफकी खांसीसे मुख कफसे लिपटा रहे, शिरमें दर्द और सब देह कफसे परि- पूर्ण रहे, अन्नमें अरुचि, शरीर भारी रहे, कण्ठमें खुजली और रोगी बारंबार खांसे, कफकी गांठ थूकनेसे सुख मालूम होय ॥ CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA