भारतकोश
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

माधवकर द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ

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भाषाटीकासमेत । ( १३३ ) होय उसको उसी पदार्थकी बलि देनेसे उस ग्रहकी शांति होती है, ऐसे ही सर्वत्र जानना । यह डल्लनका मत है । और वह मनुष्य पितरोंकी भक्ति करे । ये लक्षण पितृग्रहपीडित मनुष्यके हैं ॥ सर्पग्रहयुक्तके लक्षण । यस्त्वूर्व्यां प्रसरति सर्पवत्कदाचित्सृक्किण्यौ विलिहति जिह्वया तथैव। क्रोद्धालुर्मधुगुडदुग्धपायसेप्सुर्विज्ञेयो भवति भुजङ्ग- मेशजुष्टः ॥ २३ ॥ जो सर्पके समान पृथ्वीमें लोटा करे अर्थात् छातीके बल चले तथा सर्पके समान अपने ओष्ठप्रान्त (होठों) को चाटा करे, सदा क्रोधी रहे, शहद, गुड, दूध और खीरकी इच्छा करे वह सर्पग्रहग्रस्त जानना ॥ राक्षसग्रहपीडितके लक्षण । मांसासृग्विविधसुराविकारलिप्सुर्निर्लज्जो भृशमतिनिष्ठुरोऽति शूरः। क्रोद्धालुर्विपुलबलो निशाविहारी शौचद्विड् भवति च राक्षसैर्गृहीतः ॥ २४ ॥ जो मनुष्य मांस, रुधिर, नाना प्रकारके मद्य पीनेकी इच्छा करे और निर्लज्ज, अत्यन्त निष्ठुर, अत्यन्त शूर, क्रोधी, बडा बली, रात्रिमें डोलनेवाला, अपवित्र ऐसा होय वह राक्षसकरके ग्रस्त जानना॥ पिशाचजुष्टके लक्षण । उद्धस्तः कृशपरुषश्चिरप्रलापी दुर्गन्धो भृशमशुचिस्तथाऽतिलोलः । बह्वाशी विजनवनान्तरोपसेवी व्याचेष्टन्भ्रमति रुदन्पिशाचजुष्टः २५ जो अपने हाथ ऊपरको करे, “उद्वस्त्र” ऐसा भी पाठ है, उस जगह उद्वस्त्र नाम नंगा हो जाय, तेजरहित, बहुत देरपर्यत बकनेवाला, जिसके देहमें दुर्गन्ध आवे, अपवित्र तथा अतिचञ्चल कहिये सब अन्नपानमें इच्छा करनेवाला खानेको मिले तो बहुत भोजन करे, एकान्त वनांतरोंमें रहनेवाला, विरुद्ध चेष्टा करनेवाला, रुदन कर्त्ता, डोलनेवाला ऐसा मनुष्य पिशाचग्रस्त जानना ॥ प्रसंगवशसे ब्रह्मराक्षस और भूतोन्मादके लक्षण ग्रन्थान्तरोंसे लिखते हैं— देवविप्रगुरुद्वेषी वेदवेदाङ्गविच्छुचिः । आशुपीड़ाकरोऽहिंस्रो ब्रह्मराक्षससेवितः ॥ २६ ॥