माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)
Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation
माधवकर द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें( १५४ ) माधवनिदान । प्रलापके लक्षण । स्वहेतुकुपिताद्वातादसंबद्धानिरर्थकम् । वचनं यन्नरो ब्रूते स प्रलापः प्रकीर्तितः ॥ ७४ ॥ अपने हेतुओंसे कुपित भई जो वात सो असंबद्ध अर्थरहित वाणी बोले अर्थात् बकवाद करे अथवा बड़बड शब्द करे उसको प्रलाप कहते हैं ॥ रसाज्ञानके लक्षण । भुञ्जानस्य नरस्यान्नं मधुरप्रभृतींरसान् । रसज्ञो यन्न जानाति रसाज्ञानं तदुच्यते ॥ ७५ ॥ जो मनुष्य भोजन करे उसकी जीभको मधुर ( मीठा ) खट्टा इत्यादिक रसोंका ज्ञान न होय उस रोगको रसाज्ञान कहते हैं ॥ अनुक्तवातरोगसंग्रहार्थ कहते हैं- स्थानानामनुरूपैश्च लिङ्गैः शेषान्विनिर्दिशेत् । सर्वेष्वेतेषु संसर्ग पित्ताद्यैरुपलक्षयेत् ॥ ७६ ॥ स्थान और नाम इनके अनुरूप कहिये तुल्य ऐसे लक्षणोंसे शेष वातव्याधि जाननी । स्थानानुरूप कहिये जैसे कुक्षिशूल, नखभेद इत्यादिक । नामानुरूप कहिये जैसे शूलके कहनेसे कीलनिखातवत् पीडा जाननी । उसी प्रकार तोदभेदा- दिक करके भी पीडा विशेष जाननी चाहिये और पित्त, कफ, रुधिर इनके संस- र्गसे द्विदोषज व्याधि जाननी चाहिये ॥ साध्यासाध्य विचार । हनुस्तंभादिताक्षेपपक्षाघातापतानकाः । कालेन महताऽऽढ्यानां यत्नात्सिध्यन्ति वा न वा ॥ ७७ ॥ नरान्बलवतस्त्वेतान्साधयेन्निरुपद्रवान् ॥ ७८ ॥ हनुस्तंभ, अर्दित, आक्षेप, पक्षाघात, अपतानक ये वातव्याधि बहुत दिनमें बड़े परिश्रमसे धनी पुरुषोंके ही यत्नसाध्य होती है अथवा कभी साध्य नहीं होयँ परन्तु बलवान् पुरुषके ये वातव्याधि नई प्रगट भई हों और उपद्रव रहित हों तो उनकी चिकित्सा करनी चाहिये ॥ वातव्याधिके उपद्रव । विसर्पदाहरुक्संगमूर्च्छारुच्यग्निमार्दवैः । क्षीणमांसबलं वाता घ्नन्ति पक्षवधादयः ॥ ७९ ॥ CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA