माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)
Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation
माधवकर द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें( १६ ) माधवनिदान । प्रलापो वक्त्रकटुता मूर्च्छा दाहो मदस्तृषा । पीतविण्मूत्रनेत्रत्वक् पैत्तिके भ्रम एव च ॥ ११ ॥ ज्वरका तीक्ष्ण वेग हो, अतिसार यानी पित्तके वेगसे दस्तका पतला होना न कि अतिसार रोग हो, थोडी निद्रा आवे, पित्तको कफके स्थानमें पहुँचनेसे वम- नका होना, कण्ठ, होठ, मुख, नाक इनका पकना और पसीनोंका आना, बडब- डाना, मुखमें कडुआईट, मूर्च्छा, दाह, उन्मत्तपना, प्यास, विष्ठा, मूत्र, नेत्र, देहकीं त्वचा इनका पीला होना तथा भ्रम ये लक्षण पित्तज्वरमें होते हैं। शंका-क्योंजी ! भ्रमको वातविकारमें लिखा है इससे तो वातका धर्म है फिर पित्तके विकारमें भ्रम शब्द क्यों धरा ? उत्तर-तुमने कहा सो ठीक है परन्तु रोग एकही दोषसे नहीं प्रगट होता अनेक दोषोंसे होय है। सो लिखा है-" न रोगोऽप्येकदोषजः" और " पैत्तिक भ्रम एव च" इस श्लोकमें चकार जो पढा है इससे इस श्लोकमें जो तीव्र गरमी लाल चकत्ते शीतकी इच्छा दाह अरुचि इत्यादि जानने ॥ कफज्वरके लक्षण । स्तैमित्यं स्तिमितो वेग आलस्यं मधुरास्यता । शुक्लमूत्रपुरीषत्वक्स्तम्भस्तृप्तिरथापि च ॥ १२ ॥ गौरवं शीतमुत्क्लेदो रोमहर्षोऽतिनिद्रता । प्रतिश्यायोऽरुचिः कासः कफजेऽक्ष्णोश्च शुक्लता ॥ १३ ॥ स्तैमित्य ( गीले कपडेसे देहको आच्छादित कर देनेसे जैसा हो ऐसा मालूम हो ) ज्वरका मन्दवेग, आलस्य, मुख मीठा, मल मूत्र सफेद, देहका जकडना, तृप्तके सरीखा अन्नमें अरुचि, देह भारी, शीत लगे, ओकारी आवे । अन्य आचार्य कहते हैं कि, कफका थूकना, रोमांचका होना, अतिनिद्रा, रसके बहनेवालीनाडीके मार्गोंका रुकना, दस्तका थोडा उतरना, पसीना, मुखमें नोनकासा स्वाद हो, देहका थोडा गरम होना, रद्दका होना, लारका गिरना, मुखपाक तथा मुख नाकसे कफका पडना, अरुचि, खांसी, नेत्र श्वेत हों ये लक्षण कफज्वरमें होते हैं-"स्तंभस्तृप्तिरथापि च " इस पदमें जो चकार है उससे देहमें पीडा; शीतका लगना, लारका गिरना, वमन, तंद्रिकरोग, हृदय लिहसासा, गरमी प्यारी लगे, मन्दाग्नि इत्यादि जानने ॥ वातपित्तज्वरके लक्षण । तृष्णा मूर्च्छा भ्रमो दाहः स्वप्ननाशः शिरोरुजा । कण्ठास्यशोषो वमथू रोमहर्षोऽरुचिस्तमः ॥ १४ ॥ पर्वभेदश्च जृम्भा च वातपित्तज्वराकृतिः । CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA