भारतकोश
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

माधवकर द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ

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पृष्ठ 363

भाषाटीकासमेत । ( ३४५ ) जिस गर्भिणीका मस्तक नीचेको हो जाय, देह शीतल होय तथा लज्जा जाती रहे और जिसकी कोखमें हरी नीली शिरा (नस) उठ खडी होयँ तो वह गर्भिणी उस गर्भको और गर्भ उस गर्भिणीको अन्योन्य नाश करते हैं ॥ मृतकगर्भके लक्षण । गर्भास्पन्दनमाधीनां प्रणाशः श्यावपाण्डुता । भवेदुच्छ्वासपूतित्वं शूनतांतर्मृते शिशौ ॥ १८ ॥ गर्भ हले चले नहीं, प्रसव वेदना (पीडा) बन्द होजाय, देह हरी नीली होय और जिसकी श्वासमें दुर्गंध आवे और पेटके भीतर सूजन होय अर्थात् पेटमें आंतोंके फूलनेसे पेट सूज जाय ये गर्भमें बालक मरजाय उसके लक्षण हैं ॥ गर्भमरण हेतु । मानसागन्तुभिर्मातुरुपतापैः प्रपीडितः । गर्भो व्यापद्यते कुक्षौ व्याधिभिश्च प्रपीडितः ॥ १९ ॥ माताके मानसिक तथा आगन्तुक दुःखसे अथवा रोगोंसे गर्भको पीडा हो वह बालक गर्भाशयमें मरजाय ॥ गर्भिणीके दूसरे असाध्य लक्षण । योनिसंवररणं संगः कुक्षौ मक्कल्लमेव च । हन्युः स्त्रियं गूढगर्भो यथोक्ताश्चाप्युपद्रवाः ॥ २० ॥ वायुके योगसे योनिका संकोच, गर्भका अटकना और मक्कल्लशूल (वातरक्तकी पीडा) तथा आक्षेपक, खांसी, श्वासादिक उपद्रव होनेसे वह गर्भिणी बचे नहीं अथवा योनिसंवररणनाम रोग ग्रन्थान्तरोंमें लिखा है सो होय ॥ इति श्रीपण्डितदत्तराममाथुरनिर्मितमाधवार्थबोधिनीमाथुरीभाषाटीकायां योनिव्यापत्तिनिदानं समाप्तम् ॥ १ वातलान्यन्नपानानि ग्राम्यधर्मं प्रजागरम् । अत्यर्थं सेवमानायां गर्भिण्यां योनिमार्गजः ॥ मातरिश्वा प्रकुपितो योनिद्वारस्य संवृतिम् । कुरुते रुद्धमार्गत्वात्पुनरंतर्गतोऽनिलः॥ निरुणद्ध्या- शयद्वारं पीडयन् गर्भसंस्थितम् । निरुद्धवदनोच्छ्वासो गर्भश्चाशु विपद्यते ॥ विपन्नशूनसर्वाङ्गः सर्वाण्यवयवानि च । उच्छ्वासविरुद्धहृदयां नाशयत्याशु गर्भिणीम् ॥ योनिसंवररणं नाम व्याधि- मेनं प्रचक्षते । अन्तकप्रतिमं घोरं नारभेत चिकित्सितम् ॥ इति ॥ CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA