भारतकोश
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

माधवकर द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ

पृष्ठ 364, कुल 404 में से

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पृष्ठ 364

( १४६ ) माधवनिदान । अथ सूतिकारोगनिदानम् । अंगमर्दो ज्वरः कंपः पिपासा गुरुगात्रता । शोथः शूलातिसारौ च सूतिकारोगलक्षणम् ॥ १ ॥ अंगोंका टूटना, ज्वर हो, कंप, प्यास, अंगोंका भारी होना, सूजन तथा शूल और अतिसार ये सूतिकारोगके लक्षण होते हैं ॥ प्रसूतिरोगकी उत्पत्ति । मिथ्योपचारात्संक्लेशाद्विषमाजीर्णभोजनात् । सूतिकायाश्च ये रोगा जायन्ते दारुणास्तु ते ॥ २ ॥ जिस स्त्रीके बालक प्रगट हो चुका हो ऐसी स्त्रीके मिथ्या उपचार करनेसे अथवा संक्लेश (दोषजनक अन्नपानका सेवन अथवा अत्यन्त कोप) अथवा विषमाशन अजीर्ण भोजनादिक करनेसे प्रसूतिरोग होता है वह घोर दुःखदायक है ॥ असाध्य लक्षण । ज्वरातिसारशोथाश्च शूलानाहबलक्षयाः । तन्द्रारुचिप्रसेकाद्याः कफवातामयोद्भवाः ॥ ३ ॥ कृच्छ्रसाध्या हि ते रोगाः क्षीणमांसबलाग्नितः । ते सर्वे सूतिकानाम्ना रोगास्ते चाप्युपद्रवाः ॥ ४ ॥ ज्वर, अतिसार, सूजन, शूल, अफरा और बलक्षय तथा कफ, वातजन्य रोगसे उत्पन्न होनेवाले तन्द्रा, अन्नद्वेष और मुखसे पानीका गिरना इत्यादि विकार, अश- क्तता, अग्नि मंद होनेसे कृच्छ्रसाध्य होता है, इन सब ज्वरादिकोंको प्रसूतिरोग कहते हैं। इन सबमें एक रोग प्रधान होता है बाकीके उपद्रवरूप कहलाते हैं ॥ इति श्रीपंडित दत्तराममाथुरनिर्मितमाधवार्थबोधिनीमाथुरीभाषाटीकायां सूतिकारोगनिदानं समाप्तम् ॥ CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA

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