भारतकोश
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

माधवकर द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ

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पृष्ठ 365

भाषाटीकासमेत। (३४७) अथ स्तनरोगनिदानम् । ───◇❁◇─── सक्षीरौ वाप्यदुग्धौ वा दोषः प्राप्य स्तनौ स्त्रियाः । प्रद्रूष्य मांसरुधिरे स्तनरोगाय कल्पते ॥ १ ॥ पञ्चानामपि तेषां हि रक्तजं विद्रधिं विना । लक्षणानि समानानि बाह्यविद्रधिलक्षणैः ॥ २ ॥ वातादि दोष गर्भिणी अथवा प्रसूता स्त्रीके सदुग्ध अथवा अदुग्ध स्तनोंमें प्राप्त हो मांस रक्तको दुष्ट करके स्तनरोग उत्पन्न करे। स्तनरोग वात, पित्त, कफ, सन्निपात, आगंतुजके भेदसे पांच प्रकारके हैं। इन पांचोंके लक्षण रक्तविद्रधिको त्याग कर बाह्यविद्रधिके समान होते हैं, सो विद्रधिनिदान जो पीछे कह आये हैं उससे जानलेना चाहिये ॥ स्तन्य (दूध) के रोग । गुरुभिर्विविधैरन्नैर्दुष्टैर्दोषैः प्रद्रूषितम् । क्षीरं धात्र्याः कुमारस्य नानारोगाय कल्पते ॥ ३ ॥ गुर्वाधिक अनेक प्रकारके अन्नसे दोष (वात पित्त कफ) दुष्ट होकर माताके दूधका नाश करे, उस दुष्टदूधसे बालकके नाना प्रकारके रोग होते हैं ॥ वातादिकसे दूषित दूधके लक्षण । कषायं सलिलप्लावि स्तन्यं मारुतदूषितम् । कट्वम्ललवणं पीतराजिमत्पित्तसंज्ञितम् ॥ ४ ॥ कफदुष्टं घनं तोये निमज्जति सुपिच्छिलम् । द्विलिङ्गं द्वंद्वजं विद्यात्सर्वलिङ्गं त्रिदोषजम् ॥ ५ ॥ जो दुग्ध कसैला अथवा पानीके ऊपर तैरनेवाला होय, उसको वातदूषित जानना तथा जो कडुआ, खट्टा और खारी होकर जिसमें पीली रेखासी प्रतीत होवे उसको पित्तदूषित जानना और जो दूध सघन, चिकनासा होवे और पानीमें डालनेसे नीचेको बैठ जाय, उसको कफसे दुष्ट जानना चाहिये । दो दोषोंकें लक्षण जिसमें मिले उसे द्वंद्वज जाने और जिसमें तीनों दोषोंके लक्षण मिलें उसे त्रिदोषदूषित जाने ॥ CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA