भारतकोश
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

माधवकर द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ

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पृष्ठ 366

( ३४८ ) माधवनिदान । शुद्धदूधके लक्षण । अदुष्टं चाम्बुनि क्षिप्तमेकीभवति पाण्डुरम् । मधुरं चाविवर्णं च तत्प्रसन्नं विनिर्दिशेत् ॥ ६ ॥ जो दूध पानीमें डालनेसे मिलजाय तथा जो दूध कुछ पीला हो और मीठा होकर बेरंगका न हो उसको शुद्ध जानना ॥ अब कहते हैं कि, स्त्रियोंके दूध दीखे नहीं परंतु होता है, क्योंकि बालक पिया करते हैं, इस बातको शुक्र (वीर्य) का दृष्टान्त देकर कहते हैं- विशस्तेष्वपि गात्रेषु यथा शुक्लं न दृश्यते । सर्वदेहाश्रितत्वाच्च शुक्रलक्षणमुच्यते ॥ ७॥ जैसे सर्व पुरुषोंके देहमें व्याप्त भी है परन्तु देहके काटनेसे भी शुक्र दीखता नहीं है, उसी प्रकार सब स्त्रियोंके देहाश्रित जो दुग्ध है सो भी नहीं दीखता है परन्तु निःसन्देह है सही ॥ “ तदेव चेष्टयुवतेर्दर्शनात्स्मरणादपि । शब्दसंश्रवणात्स्पर्शात्सं हर्षाच्च प्रवर्त्तते ॥ ८ ॥ सुप्रसन्नं मनस्त्वेवं हर्षणे हेतुरुच्यते । आहाररसयोनित्वादेवं स्तन्यमपि स्त्रियाः ॥ ९ ॥ तदेवाऽपत्यसंस्पर्शाद्दर्शनात्स्मरणादपि । ग्रहणाच्च शरीरस्य शुक्रवत्सं प्रवर्त्तते ॥ स्नेहो निरन्तरस्तत्र प्रसवे हेतुरुच्यते ॥ १० ॥ वही शुक्र इष्ट (प्रिय) स्त्रीके देखनेसे, उसका स्मरण (याद) करनेसे उसकी वाणी सुननेसे, स्पर्श (आलिंगन) से भया जो आनन्द उस आनन्दसे प्राप्त होय है, इस जगह मनका प्रसन्न होना यही आनन्दका कारण है । शुक्रकी उत्पत्ति आहा- रसे होती है, सो हेतु स्तन्य (दूध) का जानना, अर्थात् दूध भी जब स्त्री अपने बालकका स्पर्श करे, देखे, उसका स्मरण करे तथा बालकको गोदमें लेनेसे दूध शुक्रके सदृश बढता है, इस जगहभी दूधके उतरनेमें स्नेह (प्यार) ही कारण है'’ यह श्लोक संगृहीत है ॥ इति श्रीपण्डितदत्तराममाथुरनिर्मितमाधवार्थबोधिनीभाषाटीकायां स्तनरोगनिदानं समाप्तम् ॥ CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA