भारतकोश
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

माधवकर द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ

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पृष्ठ 385

भाषाटीकासमेत । ( ३६७ ) आठमें भी भ्रुकुटी और कोटिक इन दोनों मेंडकोंके काटनेसे पूर्वोक्त लक्षण होयँ और दाह, मूर्च्छा अत्यन्त होय ये विशेष लक्षण हैं ॥ विषैले मत्स्य ( मछली ) के विषके लक्षण । मत्स्यास्तु सविषाः कुर्युर्दाहं शोथं रुजं तथा । विषैले मछलीके काटनेसे दाह, सूजन और शूल ये होयँ, विषैले मछलीके सत्ता- ईस भेद हैं उनके नाम नहीं लिखे इस लिये कि मिले नहीं ॥ सविषजलौका ( जोंक ) के विषके लक्षण । कण्डूं शोथं ज्वरं मूर्च्छां सविषास्तु जलौकसः ॥ ५२ ॥ विषैले जोंकके काटनेसे खुजली, सूजन, ज्वर और मूर्च्छा ये लक्षण होते हैं। विषैले जोंक काली, विचित्रवर्णकी, अलगर्दा, इन्द्रायुधा, सामुद्रिका, गोचन्दना इन भेदोंसे छः प्रकारकी है। इनमें भी अंजनचूर्णवर्णा और पृथुशिराके भेदसे काली जोंक दो प्रकारकी है। वर्म्मि मछलीके समान लम्बी छिन्नोन्नत कुक्षिक भेदसे विचित्र- वर्णकी जोंक दो प्रकारकी है। रोमशा, महापाश्र्वा, कृष्णमुखी इन भेदोंसे अल- गर्दा जोंक तीन प्रकारकी है-इन्द्रधनुषके समान ऊपरसे विचित्र होयँ वह इन्द्रा- युधा जोंक है, कुछ सफेद और पीला तथा विचित्रपुष्पके समान चित्रित ये दो भेद सामुद्रिका जोंकके हैं और बैलके अंडकोशके समान नीचेसे दो भाग होवें उसको गोचन्दना कहते हैं ॥ गृहगोधिका ( छिपकली ) के विषके लक्षण । विदाहं श्वयथुं तोदं स्वेदं च गृहगोधिका । छिपकलीके विषसे दाह होय, सूजन, नोंचनेकीसी पीडा और पसीना आवे कोई गृहगोधिकाको भाषामें विषखपरा कहते हैं ॥ शतपदी ( कानखजूरा ) के विषके लक्षण । दंशे स्वेदं रुजं दाहं कुर्याच्छतपदीविषम् ॥ ५३ ॥ कानखजूरेके काटनेसे स्थानमें पसीना आवे, शूल होय और दाह होय ॥ अब जानना चाहिये कि, परुषा, कृष्णा, चित्रा, कपीलिका, पित्तिका, रक्ता, श्वेता, अग्निप्रभा ये शतपदीके आठ भेद हैं। इनमेंसे छः तो पूर्वोक्त लक्षण करती हैं और श्वेता तथा अग्निप्रभा दो जातिकी शतपदीके काटनेसे दाह और मूर्च्छा अधिक होय ये विशेष लक्षण जानना ॥ मशक ( मच्छर वा डांस ) के विषके लक्षण । कण्डूमान्मशकैरीषच्छोथः स्यान्मन्दवेदनः । मच्छर अथवा डांसके काटनेसे किंचित् सूजन होय उसमें खुजली चले तथा CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA