भारतकोश
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

माधवकर द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ

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( २८ ) माधवनिदान । मृत्युना सह योद्धव्यं सन्निपातं चिकित्सता । यस्तु तत्र भवेज्जेता स जेताऽऽमयसंकुले ॥ ११ ॥ जो वैद्य सन्निपातकी चिकित्सा करे है वह मौतके साथ संग्राम करे है, जो इस सन्निपातको जीते अर्थात् शांत करे वह सर्व रोगके गणोंका जीतनेवाला है ॥ सन्निपातार्णवे मग्नं योऽभ्युद्धरति मानवम् । कस्तेन न कृतो धर्मः कां च पूजां न सोऽर्हति ॥ १२ ॥ जो वैद्य सन्निपातरूपी सागरमें डूबे मनुष्यको निकालता है उसने कौनसा धर्म न करा अर्थात् सब धर्म कर चुका और वह कौन पूजाके योग्य नहीं है अर्थात् वह सब पूजाओंके योग्य है ॥ संधिकादि त्रयोदश संनिपातोंके पृथक्पृथक् लक्षण। १ संधिक । पूर्वरूपकृतशूलसम्भवं शोषवातबहुवेदनान्वितम् । श्लेष्मतापबलहानिजागरं सन्निपातामिति सन्धिकं वदेत् ॥ १ ॥ जिसके पूर्वरूपमें शूल, शोष, वातसे बहुत पीडा, कफका गिरना, सन्ताप, बल- हानि, रात्रिमें जागरण ये लक्षण होयँ तिसको (संधिक) सन्निपात कहते हैं ॥ २ अन्तक । दाहं करोति परितापनमातनोति मोहं ददाति विदधाति शिरःप्रकम्पम् । हिक्कां करोति कसनं च समाज़ुहोति जानीहि तं विबुधवर्जितमन्तकाख्यम् ॥ २ ॥ दाह करे, संतापको बढावे, मोहको देवे, शिर कंपावे, हिचकी करे और खांसीको बढावे, ऐसा पंडितोंकरके त्याज्य (अन्तक) सन्निपात जानना ॥ ३ रुग्दाह । प्रलापपरितापनप्रबलमोहमान्द्यश्रमः परिश्रमरणवेदनाव्यथित- कण्ठमन्याहनुः । निरन्तरतृषाकरश्वसनकासहिक्काकुलः स कष्ट- तरसाधनो भवति हन्त रुग्दाहकः ॥ ३ ॥ अनर्थभाषण, सन्ताप, अतिमोह, मंदता, अनायास श्रम और पीडा, कंठ, मन्या नाडी और ठोडी इनमें व्यथा, निरन्तर प्यास लगे, श्वास, खांसी और हिचकी इन लक्षणोंकरके युक्त ऐसा यह (रुग्दाहनामक) सन्निपात कष्टसाध्य है ॥