माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)
Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation
माधवकर द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें( ६० ) माधवनिदान । और वातकी प्रवाहिकाके लक्षणसंयुक्त शूल, झाग, चिकटा इन लक्षण संयुक्त हौले हौले दस्त होयँ उस मनुष्यकी त्वचाका रंग तथा नख, विष्ठा, मूत्र, नेत्र, मुख ये काले होयँ, गोला तापतिल्ली ( उदररोग ) अष्ठीला ( वातकी गाँठ ) इन रोगोंके उपद्रव इस वातकी बवासीरमें होते हैं ॥ पित्तकी बवासीरके लक्षण । पित्तोत्तरा नीलमुखा रक्तपीताः सितप्रभाः । तन्वस्रस्राविणो विस्रास्तनवो मृदवः श्लथाः ॥ १६ ॥ शुकजिह्वायकृत्खण्ड- जलौकावक्त्रसन्निभाः । दाहपाकज्वरस्वेदतृण्मूर्च्छाऽरुचि- मोहदाः ॥ १७ ॥ सोष्माणो द्र्वनीलोष्णपीतरक्तामवर्चसः । यवमध्या हरितपीतहारिद्रत्वङ्नखादयः ॥ १८ ॥ मस्सोंका मुख नीला, लाल, पीला और सफेदाई लिये होवे उन मस्सोंमेंसे महीन धारसे रुधिर चुवाय और रुधिरकी वास आवे, महीन और कोमल तथा शिथिल हों और उनका आकार तोतेकी जीभ कलेजा और जोंकके मुखके समान हो और देहमें दाह हो, गुदाका पकना, ज्वर, पसीना, प्यास, मूर्च्छा, अरुचि और मोह ये होवें और हाथके स्पर्श करनेसे गरम मालूम होवे और जिसके मलका द्रव नीला, पीला, लाल, गरम, आमसंयुक्त होय, जबके समान बीचमें मोटे हों और जिसकी त्वचा, नख नेत्रादिक हरे पीले हरतालके समान और हलदीके समान होवे ये लक्षण पित्ताधिक बवासीरके हैं ॥ कफकी बवासीरके लक्षण । श्लेष्मोल्वणा महामूला घना मन्दरुजः सिताः । उत्सन्नो- पचिताः स्निग्धाः स्तब्धा वृत्तगुरुस्थिराः ॥१९॥ पिच्छिलाः स्तिमिताः श्लक्ष्णाः कण्ड्वाढ्याः स्पर्शनाप्रियाः । करीर- पनसास्थ्याभास्तथा गोस्तनसन्निभाः॥ २०॥ वंक्षणानाहिनः पायुवस्तिनाभिविकारिणः । सश्वासकासहृल्लासप्रसेकारुचि- पीनसाः ॥ २१ ॥ मेहकृच्छ्रशिरोजाड्यशिशिरज्वरकारिणः। क्लैब्याग्निमार्दवच्छर्दिरानप्रायविकारदाः ॥ २२ ॥ वसाभाः १ "सामान्यतो बवासीरो रीही खूनी द्विधा भवेत् । खूनी ह्यपि च वातस्य विना कोपं न संभवेत् ॥ १ ॥" इति यवनशास्त्रे । CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA