भारतकोश
महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व

महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व

Mahabharata (Vol 1) - Adi and Sabha Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,256 पृष्ठ

पृष्ठ 1417, कुल 2256 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 1417

महाराज! इसीलिये ये दोनों महातेजस्वी महात्मा आपके सामने कुछ खोलकर नहीं कह सके हैं। इन्होंने आपको ठीक ही सलाह दी है; परंतु आप उसे निश्चितरूपसे स्वीकार नहीं करते हैं ।। १४ ।।

यच्चाप्यशक्यतां तेषामाहतुः पुरुषर्षभौ । तत् तथा पुरुषव्याघ्र तव तद् भद्रमस्तु ते ।। १५ ।।

इन पुरुषशिरोमणियोंने जो पाण्डवोंके अजेय होनेकी बात बतायी है, वह बिलकुल ठीक है। पुरुषसिंह! आपका कल्याण हो ।। १५ ।।

कथं हि पाण्डवः श्रीमान् सव्यसाची धनंजयः । शक्यो विजेतुं संग्रामे राजन् मघवतापि हि ।। १६ ।।

राजन्! दायें-बायें दोनों हाथोंसे बाण चलानेवाले श्रीमान् पाण्डुकुमार धनंजयको साक्षात् इन्द्र भी युद्धमें कैसे जीत सकते हैं? ।। १६ ।।

भीमसेनो महाबाहुर्नागायुतबलो महान् । कथं स्म युधि शक्येत विजेतुममरैरपि ।। १७ ।।

दस हजार हाथियोंके समान महान् बलवान् महाबाहु भीमसेनको युद्धमें देवता भी कैसे जीत सकते हैं? ।। १७ ।।

तथैव कृतिनौ युद्धे यमौ यमसुताविव । कथं विजेतुं शक्यौ तौ रणे जीवितुमिच्छता ।। १८ ।।

इसी प्रकार जो जीवित रहना चाहता है, उसके द्वारा युद्धमें निपुण तथा यमराजके पुत्रोंकी भाँति भयंकर दोनों भाई नकुल-सहदेव कैसे जीते जा सकते हैं? ।। १८ ।।

यस्मिन् धृतिरनुक्रोशः क्षमा सत्यं पराक्रमः । नित्यानि पाण्डवे ज्येष्ठे स जीयेत रणे कथम् ।। १९ ।।

जिन ज्येष्ठ पाण्डव युधिष्ठिरमें धैर्य, दया, क्षमा, सत्य और पराक्रम आदि गुण नित्य निवास करते हैं, उन्हें रणभूमिमें कैसे हराया जा सकता है? ।। १९ ।।

येषां पक्षधरो रामो येषां मन्त्री जनार्दनः । किं नु तैरजितं संख्ये येषां पक्षे च सात्यकिः ।। २० ।।

बलरामजी जिनके पक्षपाती हैं, भगवान् श्रीकृष्ण जिनके सलाहकार हैं तथा जिनके पक्षमें सात्यकि-जैसा वीर है, वे पाण्डव युद्धमें किसे नहीं परास्त कर देंगे? ।। २० ।।

द्रुपदः श्वशुरो येषां येषां श्यालाश्च पार्षताः । धृष्टद्युम्नमुखा वीरा भ्रातरो द्रुपदात्मजाः ।। २१ ।। सोऽशक्यतां च विज्ञाय तेषामग्रे च भारत । दायाद्यतां च धर्मेण सम्यक् तेषु समाचर ।। २२ ।।

द्रुपद जिनके श्वशुर हैं और उनके पुत्र पृषतवंशी धृष्टद्युम्न आदि वीर भ्राता जिनके साले हैं, भारत! ऐसे पाण्डवोंको रणभूमिमें जीतना असम्भव है। इस बातको जानकर तथा पहले

महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व · पृष्ठ 1417, कुल 2256 में से · BharatKosha