भारतकोश
महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व

महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व

Mahabharata (Vol 1) - Adi and Sabha Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,256 पृष्ठ

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पृष्ठ 1993

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त्रिचत्वारिंशोऽध्यायः

भीष्मजीके द्वारा शिशुपालके जन्मके वृत्तान्तका वर्णन

भीष्म उवाच

चेदिराजकुले जातस्त्र्यक्ष एष चतुर्भुजः ।
रासभारावसदृशं ररास च ननाद च ॥ १ ॥
भीष्मजी बोले— भीमसेन! सुनो, चेदिराज दमघोषके कुलमें जब यह शिशुपाल उत्पन्न हुआ, उस समय इसके तीन आँखें और चार भुजाएँ थीं। इसने रोनेकी जगह गदहेके रेंकनेकी भाँति शब्द किया और जोर-जोरसे गर्जना भी की ॥ १ ॥

तेनास्य मातापितरौ त्रेसतुस्तौ सबान्धवौ ।
वैकृतं तस्य तौ दृष्ट्वा त्यागायाकुरुतां मतिम् ॥ २ ॥
इससे इसके माता-पिता अन्य भाई-बन्धुओंसहित भयसे थर्रा उठे। इसकी वह विकराल आकृति देख उन्होंने इसे त्याग देनेका निश्चय किया ॥ २ ॥

ततः सभार्यं नृपतिं सामात्यं सपुरोहितम् ।
चिन्तासम्मूढहृदयं वागुवाचाशरीरिणी ॥ ३ ॥
पत्नी, पुरोहित तथा मन्त्रियोंसहित चेदिराजका हृदय चिन्तासे मोहित हो रहा था। उस समय आकाशवाणी हुई— ॥ ३ ॥