महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व
Mahabharata (Vol 1) - Adi and Sabha Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१- भगवान् श्रीकृष्णकी आज्ञाके अनुसार मयासुरद्वारा सभाभवन बनानेकी तैयारी २- श्रीकृष्णकी द्वारकायात्रा ३- मयासुरका भीमसेन और अर्जुनको गदा और शंख लाकर देना तथा उसके द्वारा अद्भुत सभाका निर्माण ४- मयद्वारा निर्मित सभाभवनमें धर्मराज युधिष्ठिरका प्रवेश तथा सभामें स्थित महर्षियों और राजाओं आदिका वर्णन
(लोकपालसभाख्यानपर्व)
५- नारदजीका युधिष्ठिरकी सभामें आगमन और प्रश्नके रूपमें युधिष्ठिरको शिक्षा देना ६- युधिष्ठिरकी दिव्य सभाओंके विषयमें जिज्ञासा ७- इन्द्रसभाका वर्णन ८- यमराजकी सभाका वर्णन ९- वरुणकी सभाका वर्णन १०- कुबेरकी सभाका वर्णन ११- ब्रह्माजीकी सभाका वर्णन १२- राजा हरिश्चन्द्रका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरके प्रति राजा पाण्डुका संदेश
(राजसूयारम्भपर्व)
१३- युधिष्ठिरका राजसूयविषयक संकल्प और उसके विषयमें भाइयों, मन्त्रियों, मुनियों तथा श्रीकृष्णसे सलाह लेना १४- श्रीकृष्णकी राजसूययज्ञके लिये सम्मति १५- जरासंधके विषयमें राजा युधिष्ठिर, भीम और श्रीकृष्णकी बातचीत १६- जरासंधको जीतनेके विषयमें युधिष्ठिरके उत्साहहीन होनेपर अर्जुनका उत्साहपूर्ण उद्गार १७- श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी बातका अनुमोदन तथा युधिष्ठिरको जरासंधकी उत्पत्तिका प्रसंग सुनाना १८- जरा राक्षसीका अपना परिचय देना और उसीके नामपर बालकका नामकरण होना १९- चण्डकौशिक मुनिके द्वारा जरासंधका भविष्यकथन तथा पिताके द्वारा उसका राज्याभिषेक करके वनमें जाना
(जरासंधवधपर्व)
२०- युधिष्ठिरके अनुमोदन करनेपर श्रीकृष्ण, अर्जुन और भीमसेनकी मगध-यात्रा