भारतकोश
महाभारत (खंड २) - वन पर्व

महाभारत (खंड २) - वन पर्व

Mahabharata (Vol 2) - Vana Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,580 पृष्ठ

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पृष्ठ 1507

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अष्टादशाधिकद्विशततमोऽध्यायः

अंगिराकी संततिका वर्णन

मार्कण्डेय उवाच

ब्रह्मणो यस्तृतीयस्तु पुत्रः कुरुकुलोद्वह ।
तस्याभवत् सुभा भार्या प्रजास्तस्यां च मे शृणु ॥ १ ॥
**मार्कण्डेयजी कहते हैं—**कुरुकुलधुरन्धर युधिष्ठिर! ब्रह्माजीके जो तीसरे पुत्र अंगिरा हैं, उनकी पत्नीका नाम सुभा है। उसके गर्भसे जो संतानें उत्पन्न हुईं, उनका वर्णन करता हूँ, सुनो ॥ १ ॥

बृहत्कीर्तिर्बृहज्ज्योतिर्बृहद्ब्रह्मा बृहन्मनाः ।
बृहन्मन्त्रो बृहद्भासस्तथा राजन् बृहस्पतिः ॥ २ ॥
राजन्! बृहत्कीर्ति, बृहज्ज्योति, बृहद्ब्रह्मा, बृहन्मना, बृहन्मन्त्र, बृहद्भास तथा बृहस्पति (ये अंगिरासे सुभाके सात पुत्र हुए) ॥ २ ॥

प्रजासु तासु सर्वासु रूपेणाप्रतिमाभवत् ।
देवी भानुमती नाम प्रथमाङ्गिरसः सुता ॥ ३ ॥
अंगिराकी प्रथम पुत्रीका नाम देवी भानुमती है। वह उनकी संतानोंमें सबसे अधिक रूपवती है; उसके रूपकी कहीं तुलना ही नहीं है (भानु अर्थात् सूर्यसे युक्त होनेके कारण यह दिनकी अभिमानिनी है) ॥ ३ ॥

भूतानामेव सर्वेषां यस्यां रागस्तदाभवत् ।
रागाद्रागेति यामाहुर्द्वितीयाङ्गिरसः सुता ॥ ४ ॥
अंगिरा मुनिकी दूसरी कन्या 'रागा' नामसे विख्यात है। उसपर समस्त प्राणियोंका विशेष अनुराग प्रकट हुआ था। इसीलिये उसका ऐसा नाम प्रसिद्ध हुआ। (यह रात्रिकी अभिमानिनी है) ॥ ४ ॥

यां कपर्दिसुतामाहुर्दृश्यादृश्येति देहिनः ।
तनुत्वात् सा सिनीवाली तृतीयाङ्गिरसः सुता ॥ ५ ॥
अंगिराकी तीसरी पुत्री 'सिनीवाली' (चतुर्दशीयुक्ता अमावास्या) है जो अत्यन्त कृश होनेके कारण कभी दीखती है और कभी नहीं दीखती; इसीलिये लोग उसे 'दृश्यादृश्या' कहते हैं। भगवान् रुद्र उसे ललाटमें धारण करते हैं, इस कारण उसे सब लोग 'रुद्रसुता, भी कहते हैं ॥ ५ ॥

पश्यत्यर्चिष्मती भाभिर्विभिर्विश्वं हविष्मती ।
षष्ठीमङ्गिरसः कन्यां पुण्यामाहुर्महिष्मतीम् ॥ ६ ॥