भारतकोश
महाभारत (खंड २) - वन पर्व

महाभारत (खंड २) - वन पर्व

Mahabharata (Vol 2) - Vana Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

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पृष्ठ 1840

दमनका कार्य करेंगे ।। ५ ।।

मार्काण्डेय उवाच

पितामहस्ततस्तेषां संनिधौ शक्रमब्रवीत् । सर्वैर्देवगणैः सार्धं सम्भव त्वं महीतले ।। ६ ।। **मार्कण्डेयजी कहते हैं—**राजन्! तदनन्तर ब्रह्माजीने उन देवताओंके समीप ही इन्द्रसे कहा—'तुम समस्त देवताओंके साथ भूतलपर जन्म ग्रहण करो ।। ६ ।।

विष्णोः सहायान्‌ऋक्षीषु वानरीषु च सर्वशः । जनयध्वं सुतान् वीरान् कामरूपबलान्वितान् ।। ७ ।। 'वहाँ रीछों और वानरोंकी स्त्रियोंसे ऐसे वीर पुत्रको उत्पन्न करो, जो इच्छानुसार रूप धारण करनेमें समर्थ, बलवान् तथा भूतलपर अवतीर्ण हुए भगवान् विष्णुके योग्य सहायक हों' ।। ७ ।।

ततो भागानुभागेन देवगन्धर्वपन्नगाः । अवतर्तुं महीं सर्वे मन्त्रयामासुरञ्जसा ।। ८ ।। तदनन्तर देवता, गन्धर्व और नाग अपने-अपने अंश एवं अंशांशसे इस पृथ्वीपर अवतीर्ण होनेके लिये परस्पर परामर्श करने लगे ।। ८ ।।

तेषां समक्षं गन्धर्वी दुन्दुभीं नाम नामतः । शशास वरदो देवो गच्छ कार्यार्थसिद्धये ।। ९ ।। फिर वरदायक देवता ब्रह्माजीने उन सबके सामने ही दुन्दुभी नामवाली गन्धर्वीको आज्ञा दी कि 'तुम भी देवताओंका कार्य सिद्ध करनेके लिये भूतलपर जाओ ।। ९ ।।

पितामहवचः श्रुत्वा गन्धर्वी दुन्दुभी ततः । मन्थरा मानुषे लोके कुब्जा समभवत् तदा ।। १० ।। पितामहकी बात सुनकर गन्धर्वी दुन्दुभी मनुष्यलोकमें आकर मन्थरा नामसे प्रसिद्ध कुबड़ी दासी हुई ।। १० ।।

शक्रप्रभृतयश्चैव सर्वे ते सुरसत्तमाः । वानरर्क्षवरस्त्रीषु जनयामासुरात्मजान् ।। ११ ।। तेऽन्ववर्तन् पितॄन् सर्वे यशसा च बलेन च । भेत्तारो गिरिशृङ्गाणां शालतालशिलायुधाः ।। १२ ।। इन्द्र आदि समस्त श्रेष्ठ देवता भी वानरों तथा रीछोंकी उत्तम स्त्रियोंसे संतान उत्पन्न करने लगे। वे सब वानर और रीछ यश तथा बलमें अपने पिता देवताओंके समान ही हुए। वे पर्वतोंके शिखर तोड़ डालनेकी शक्ति रखते थे एवं शाल (साखू) और ताल (ताड़)-के वृक्ष तथा पत्थरोंकी चट्टानें ही उनके आयुध थे ।। ११-१२ ।।

वज्रसंहननाः सर्वे सर्वे चौघबलास्तथा ।