भारतकोश
महाभारत (खंड २) - वन पर्व

महाभारत (खंड २) - वन पर्व

Mahabharata (Vol 2) - Vana Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,580 पृष्ठ

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पृष्ठ 2401

उत्तर उवाच

दश पार्थस्य नामानि यानि पूर्वं श्रुतानि मे । प्रब्रूयास्तानि यदि मे श्रद्दध्यां सर्वमेव ते ॥ ७ ॥ उत्तर बोला— मैंने पहलेसे जो अर्जुनके दस नाम सुन रखे हैं, उन्हें यदि तुम बता दो तो मैं तुम्हारी सारी बातोंपर विश्वास कर सकता हूँ ॥ ७ ॥

अर्जुन उवाच

हन्त तेऽहं समाचक्षे दश नामानि यानि मे । वैराटे शृणु तानि त्वं यानि पूर्वं श्रुतानि ते ॥ ८ ॥ अर्जुनने कहा— विराटपुत्र! मेरे जो दस नाम हैं और जिन्हें तुमने पहलेसे ही सुन रखा है, उनका वर्णन करता हूँ, सुनो ॥ ८ ॥ एकाग्रमानसो भूत्वा शृणु सर्वं समाहितः । अर्जुनः फाल्गुनो जिष्णुः किरीटी श्वेतवाहनः । बीभत्सुर्विजयः कृष्णः सव्यसाची धनंजयः ॥ ९ ॥ एकाग्रचित्त हो सावधानीके साथ सबको सुनना। (वे नाम ये हैं—) अर्जुन, फाल्गुन, जिष्णु, किरीटी, श्वेतवाहन, बीभत्सु, विजय, कृष्ण, सव्यसाची और धनंजय ॥ ९ ॥

उत्तर उवाच

केनासि विजयो नाम केनासि श्वेतवाहनः । किरीटी नाम केनासि सव्यसाची कथं भवान् ॥ १० ॥ उत्तरने पूछा— किस कारणसे आपका नाम विजय हुआ और किसलिये आप श्वेतवाहन कहलाते हैं? आपके किरीटी नाम धारण करनेका क्या कारण है? और आप सव्यसाची नामसे कैसे प्रसिद्ध हुए? ॥ १० ॥ अर्जुनः फाल्गुनो जिष्णुः कृष्णो बीभत्सुरेव च । धनंजयश्च केनासि ब्रूहि तन्मम तत्त्वतः ॥ ११ ॥ इसी प्रकार आपके अर्जुन, फाल्गुन, जिष्णु, कृष्ण, बीभत्सु और धनंजय नाम पड़नेका भी क्या कारण है? यह सब मुझे ठीक-ठीक बताइये ॥ ११ ॥ श्रुता मे तस्य वीरस्य केवला नामहेतवः । तत् सर्वं यदि मे ब्रूयाः श्रद्दध्यां सर्वमेव ते ॥ १२ ॥ वीर अर्जुनके विभिन्न नाम पड़नेके जो प्रधान हेतु हैं, वे सब मैंने सुन रखे हैं। उन सबको यदि आप बता देंगे तो आपकी सब बातोंपर मेरा विश्वास हो जायगा ॥

अर्जुन उवाच

सर्वान् जनपदान् जित्वा वित्तमादाय केवलम् ।