भारतकोश
महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

Mahabharata (Vol 3) - Virata, Udyoga and Bhishma Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,343 पृष्ठ

पृष्ठ 1953, कुल 2343 में से

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पृष्ठ 1953

सौभद्रो द्रौपदेयाश्च राक्षसश्च घटोत्कचः ।। ७ ।। सात्यकिर्धर्मराजश्च व्यूहग्रीवां समास्थिताः । महाराज! महाबली भीमसेन उसके मुखकी जगह खड़े हुए। सुभद्राकुमार अभिमन्यु, द्रौपदीके पाँच पुत्र, राक्षस घटोत्कच, सात्यकि और धर्मराज युधिष्ठिर—ये उस मकरव्यूहके ग्रीवाभागमें स्थित हुए ।। ७ १/२ ।।

पृष्ठमासीन्महाराज विराटो वाहिनीपतिः ।। ८ ।। धृष्टद्युम्नेन सहितो महत्या सेनयावृतः । नरेश्वर! सेनापति विराट विशाल सेनासे घिरकर धृष्टद्युम्नके साथ उस व्यूहके पृष्ठ भागमें खड़े हुए ।।

केकया भ्रातरः पञ्च वामपार्श्वं समाश्रिताः ।। ९ ।। धृष्टकेतुर्नरव्याघ्रश्चेकितानश्च वीर्यवान् । दक्षिणं पक्षमाश्रित्य स्थितौ व्यूहस्य रक्षणे ।। १० ।। पाँच भाई केकयराजकुमार उनके वामपार्श्वमें खड़े थे। नरश्रेष्ठ धृष्टकेतु और पराक्रमी चेकितान—ये व्यूहके दाहिने भागमें स्थित होकर उसकी रक्षा करते थे ।। ९-१० ।।

पादयोस्तु महाराज स्थितः श्रीमान् महारथः । कुन्तिभोजः शतानीको महत्या सेनयावृतः ।। ११ ।। महाराज! उसके दोनों पैरोंकी जगह महारथी श्रीमान् कुन्तिभोज और विशाल सेनासहित शतानीक खड़े थे ।। ११ ।।

शिखण्डी तु महेष्वासः सोमकैः संवृतो बली । इरावांश्च ततः पुच्छे मकरस्य व्यवस्थितौ ।। १२ ।। सोमकोंसे घिरा हुआ महाधनुर्धर शिखण्डी और बलवान् इरावान्—ये दोनों उस मकरव्यूहके पुच्छ-भागमें खड़े थे ।। १२ ।।

एवमेतं महाव्यूहं व्यूह्य भारत पाण्डवाः । सूर्योदये महाराज पुनर्युद्धाय दंशिताः ।। १३ ।। महाराज! भरतनन्दन! इस प्रकार उस महान् मकरव्यूहकी रचना करके पाण्डव कवच बाँधकर सूर्योदयके समय पुनः युद्धके लिये तैयार हो गये ।। १३ ।।

कौरवानभ्ययुस्तूर्णं हस्त्यश्वरथपत्तिभिः । समुच्छ्रितैर्ध्वजैश्छत्रैः शस्त्रैश्च विमलैः शितैः ।। १४ ।। ऊँची-ऊँची ध्वजाओं, छत्रों तथा चमकीले और तीखे अस्त्र-शस्त्रोंसे युक्त हाथी, घोड़े, रथ और पैदल सैनिकोंकी चतुरंगिणी सेनाके साथ पाण्डवोंने कौरवोंपर शीघ्रतापूर्वक आक्रमण किया ।। १४ ।।

व्यूढं दृष्ट्वा तु तत् सैन्यं पिता देवव्रतस्तव । क्रौञ्चेन महता राजन् प्रत्यव्यूहत वाहिनीम् ।। १५ ।।

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