महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व
Mahabharata (Vol 3) - Virata, Udyoga and Bhishma Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें९७- कण्व मुनिका दुर्योधनको संधिके लिये समझाते हुए मातलीका उपाख्यान आरम्भ करना ९८- मातलीका अपनी पुत्रीके लिये वर खोजनेके निमित्त नारदजीके साथ वरुणलोकमें भ्रमण करते हुए अनेक आश्चर्यजनक वस्तुएँ देखना ९९- नारदजीके द्वारा पाताललोकका प्रदर्शन १००- हिरण्यपुरका दिग्दर्शन और वर्णन १०१- गरुड़लोक तथा गरुड़की संतानोंका वर्णन १०२- सुरभि और उसकी संतानोंके साथ रसातलके सुखका वर्णन १०३- नागलोकके नागोंका वर्णन और मातलीका नागकुमार सुमुखके साथ अपनी कन्याको ब्याहनेका निश्चय १०४- नारदजीका नागराज आर्यकके सम्मुख सुमुखके साथ मातलीकी कन्याके विवाहका प्रस्ताव एवं मातलीका नारदजी, सुमुख एवं आर्यकके साथ इन्द्रके पास आकर उनके द्वारा सुमुखको दीर्घायु प्रदान कराना तथा सुमुख-गुणकेशी-विवाह १०५- भगवान् विष्णुके द्वारा गरुड़का गर्वभंजन तथा दुर्योधनद्वारा कण्वमुनिके उपदेशकी अवहेलना १०६- नारदजीका दुर्योधनको समझाते हुए धर्मराजके द्वारा विश्वामित्रजीकी परीक्षा तथा गालवके विश्वामित्रसे गुरुदक्षिणा माँगनेके लिये हठका वर्णन १०७- गालवकी चिन्ता और गरुड़का आकर उन्हें आश्वासन देना १०८- गरुड़का गालवसे पूर्व दिशाका वर्णन करना १०९- दक्षिण दिशाका वर्णन ११०- पश्चिम दिशाका वर्णन १११- उत्तर दिशाका वर्णन ११२- गरुड़की पीठपर बैठकर पूर्व दिशाकी ओर जाते हुए गालवका उनके वेगसे व्याकुल होना ११३- ऋषभ पर्वतके शिखरपर महर्षि गालव और गरुड़की तपस्विनी शाण्डिलीसे भेंट तथा गरुड़ और गालवका गुरुदक्षिणा चुकानेके विषयमें परस्पर विचार ११४- गरुड़ और गालवका राजा ययातिके यहाँ जाकर गुरुको देनेके लिये श्यामकर्ण घोड़ोंकी याचना करना ११५- राजा ययाति का गालवको अपनी कन्या देना और गालवका उसे लेकर अयोध्यानरेशके यहाँ जाना ११६- हर्यश्वका दो सौ श्यामकर्ण घोड़े देकर ययाति-कन्याके गर्भसे वसुमना नामक पुत्र उत्पन्न करना और गालवका इस कन्याके साथ वहाँसे प्रस्थान ११७- दिवोदासका ययातिकन्या माधवीके गर्भसे प्रतर्दन नामक पुत्र उत्पन्न करना