महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व
Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 1290, कुल 3237 में से
संदर्भ में पढ़ेंमज्जतां धार्तराष्ट्रेषु भव पारं परंतप ॥ ५६ ॥ परंतप! रातके समय कर्णके बाणोंसे क्षत-विक्षत होकर पाण्डव-सैनिकोंके पाँव उखड़ गये हैं और वे कौरव-सेनारूपी समुद्रमें डूब रहे हैं। तुम उनके लिये तटभूमि बन जाओ ॥ ५६ ॥
रात्रौ हि राक्षसा भूयो भवन्त्यमितविक्रमाः । बलवन्तः सुदुर्धर्षाः शूरा विक्रान्तचारिणः ॥ ५७ ॥ रात्रिके समय राक्षसोंका अनन्त पराक्रम और भी बढ़ जाता है। वे बलवान्, परम दुर्धर्ष, शूरवीर और पराक्रमपूर्वक विचरनेवाले होते हैं ॥ ५७ ॥
जहि कर्णं महेष्वासं निशीथे मायया रणे । पार्था द्रोणं वधिष्यन्ति धृष्टद्युम्नपुरोगमाः ॥ ५८ ॥ तुम आधी रातके समय अपनी मायाद्वारा रणभूमिमें महाधनुर्धर कर्णको मार डालो और धृष्टद्युम्न आदि पाण्डव-सैनिक द्रोणाचार्यका वध करेंगे ॥ ५८ ॥
संजय उवाच
केशवस्य वचः श्रुत्वा बीभत्सुरपि राक्षसम् । अभ्यभाषत कौरव्य घटोत्कचमरिंदमम् ॥ ५९ ॥ **संजय कहते हैं—**कुरुराज! भगवान् श्रीकृष्णका यह वचन सुनकर अर्जुनने भी शत्रुओंका दमन करनेवाले राक्षस घटोत्कचसे कहा— ॥ ५९ ॥
घटोत्कच भवांश्चैव दीर्घबाहुश्च सात्यकिः । मतो मे सर्वसैन्येषु भीमसेनश्च पाण्डवः ॥ ६० ॥ ‘घटोत्कच! मेरी सम्पूर्ण सेनाओंमें तीन ही वीर श्रेष्ठ माने गये हैं—तुम, महाबाहु सात्यकि तथा पाण्डुनन्दन भीमसेन ॥ ६० ॥
तद्भवान् यातु कर्णेन द्वैरथं युध्यतां निशि । सात्यकिः पृष्ठगोपस्ते भविष्यति महारथः ॥ ६१ ॥ ‘अतः तुम इस निशीथकालमें कर्णके साथ द्वैरथ युद्ध करो और महारथी सात्यकि तुम्हारे पृष्ठरक्षक होंगे ॥
जहि कर्णं रणे शूरं सात्वतेन सहायवान् । यथेन्द्रस्तारकं पूर्वं स्कन्देन सह जघ्निवान् ॥ ६२ ॥ ‘जैसे पूर्वकालमें स्कन्दके साथ रहकर इन्द्रने तारकासुरका वध किया था, उसी प्रकार तुम भी सात्यकिकी सहायता पाकर रणभूमिमें शूरवीर कर्णको मार डालो’ ॥
घटोत्कच उवाच
(एवमेव महाबाहो यथा वदसि मां प्रभो । त्वया नियुक्तो गच्छामि कर्णस्य वधकाङ्क्षया ॥)