महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व
Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 2195, कुल 3237 में से
संदर्भ में पढ़ेंसुवर्णजटित विचित्र आयुध विद्युत्के समान प्रकाशित होते थे। बाण, खड्ग और नाराच आदि बड़े-बड़े अस्त्रोंकी धारावाहिक वृष्टि हो रही थी। धीरे-धीरे उस युद्धका वेग बड़ा भयंकर हो उठा, रक्तका स्रोत बह चला। तलवारोंकी खचाखच मार होने लगी, जिससे क्षत्रियोंके प्राणोंका संहार होने लगा ।। ३-४ ।।
एकं रथं सम्परिवार्य मृत्युं नयन्त्यनेके च रथाः समेताः । एकस्तथैकं रथिनं रथाग्र्यां- स्तथा रथश्चापि रथाननेकान् ।। ५ ।। बहुत-से रथी एक साथ मिलकर किसी एक रथीको घेर लेते और उसे यमलोक पहुँचा देते थे। इसी प्रकार एक रथी एक रथीको और अनेक श्रेष्ठ रथियोंको भी यमलोकका पथिक बना देता था ।। ५ ।।
रथं ससूतं सहयं च कञ्चित् कश्चिद्रथी मृत्युवशं निनाय । निनाय चाप्येकगजेन कश्चिद् रथान् बहून् मृत्युवशे तथाश्वान् ।। ६ ।। किसी रथीने किसी एक रथीको घोड़ों और सारथिसहित मौतके हवाले कर दिया तथा किसी दूसरे वीरने एकमात्र हाथीके द्वारा बहुत-से रथियों और घोड़ोंको मौतका ग्रास बना दिया ।। ६ ।।
रथान् ससूतान् सहयान् गजांश्च सर्वानरीन् मृत्युवशं शरौघैः । निन्ये हयांश्चैव तथा ससादीन् पदातिसङ्घांश्च तथैव पार्थः ।। ७ ।। उस समय अर्जुनने सारथिसहित रथों, घोड़ों-सहित हाथियों, समस्त शत्रुओं, सवारोंसहित घोड़ों तथा पैदलसमूहोंको भी अपने बाणसमूहोंद्वारा मृत्युके अधीन कर दिया ।। ७ ।।
कृपः शिखण्डी च रणे समेतौ दुर्योधनं सात्यकिरभ्यगच्छत् । श्रुतश्रवा द्रोणपुत्रेण सार्धं युधामन्युश्चित्रसेनेन सार्धम् ।। ८ ।। उस रणभूमिमें कृपाचार्य और शिखण्डी एक-दूसरेसे भिड़े थे, सात्यकिने दुर्योधनपर धावा किया था, श्रुतश्रवा द्रोणपुत्र अश्वत्थामाके साथ जूझ रहा था और युधामन्यु चित्रसेनके साथ युद्ध कर रहे थे ।। ८ ।।
कर्णस्य पुत्रं तु रथी सुषेणं