महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व
Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 2488, कुल 3237 में से
संदर्भ में पढ़ेंधनुषको कँपाते हुए सिंधी घोड़ोंसे युक्त श्रेष्ठ रथपर आरूढ़ हो पाण्डवोंपर आक्रमण किया॥ २०—२२॥
तस्य सूतो महाराज रथस्थोऽशोभयद् रथम्।
स तेन संवृतो वीरो रथेनामित्रकर्षणः॥ २३॥
तस्थौ शूरो महाराज पुत्राणां ते भयप्रणुत्।
राजाधिराज! शल्यके रथपर बैठा हुआ उनका सारथि उस रथकी शोभा बढ़ा रहा था। उस रथसे घिरे हुए शत्रुसूदन शूरवीर राजा शल्य आपके पुत्रोंका भय दूर करते हुए युद्धके लिये खड़े हो गये॥ २३ १/२॥
प्रयाणे मद्रराजोऽभून्मुखं व्यूहस्य दंशितः॥ २४॥
मद्रकैः सहितो वीरैः कर्णपुत्रैश्च दुर्जयैः।
प्रस्थानकालमें कवचधारी मद्रराज शल्य उस सैन्यव्यूहके मुखस्थानमें थे। उनके साथ मद्रदेशीय वीर तथा कर्णके दुर्जय पुत्र भी थे॥ २४ १/२॥
सव्येऽभूत् कृतवर्मा च त्रिगर्तैः परिवारितः॥ २५॥
गौतमो दक्षिणे पार्श्वे शकैश्च यवनैः सह।
अश्वत्थामा पृष्ठतोऽभूत् काम्बोजैः परिवारितः॥ २६॥
व्यूहके वामभागमें त्रिगर्तोंसे घिरा हुआ कृतवर्मा खड़ा था। दक्षिण पार्श्वमें शकों और यवनोंकी सेनाके साथ कृपाचार्य थे और पृष्ठभागमें काम्बोजोंसे घिरकर अश्वत्थामा खड़ा था॥ २५-२६॥
दुर्योधनोऽभवन्मध्ये रक्षितः कुरुपुङ्गवैः।
हयानीकेन महता सौबलश्चापि संवृतः॥ २७॥
प्रययौ सर्वसैन्येन कैतव्यश्च महारथः।
मध्यभागमें कुरुकुलके प्रमुख वीरोंद्वारा सुरक्षित दुर्योधन और घुड़सवारोंकी विशाल सेनासे घिरा हुआ शकुनि भी था। उसके साथ महारथी उलूक भी सम्पूर्ण सेनासहित युद्धके लिये आगे बढ़ रहा था॥ २७ १/२॥
पाण्डवाश्च महेष्वासा व्यूह्य सैन्यमरिंदमाः॥ २८॥
त्रिधा भूता महाराज तव सैन्यमुपाद्रवन्।
महाराज! शत्रुओंका दमन करनेवाले महाधनुर्धर पाण्डव भी सेनाका व्यूह बनाकर तीन भागोंमें विभक्त हो आपकी सेनापर चढ़ आये॥ २८ १/२॥
धृष्टद्युम्नः शिखण्डी च सात्यकिश्च महारथः॥ २९॥
शल्यस्य वाहिनीं हन्तुमभिदुद्रुवुराहवे।
(उन तीनोंके अध्यक्ष थे—) धृष्टद्युम्न, शिखण्डी और महारथी सात्यकि। इन लोगोंने युद्धस्थलमें शल्यकी सेनाका वध करनेके लिये उसपर धावा बोल दिया॥ २९ १/२॥